अवैध संबंधों के चलते हत्या करने वाले आरोपी को आजीवन कारावास
रतलाम,17जून (इ खबर टुडे)। पत्नी से अवैध संबंध की जानकारी होने पर युवक की दराते से गला काटकर हत्या करने वाले आरोपी को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अष्टम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश निर्मल मंडोरिया ने सत्र प्रकरण क्रमांक 72/2022 में फैसला सुनाते हुए अभियुक्त राजेश (27) पिता बेहरिंग मईड़ा, निवासी ग्राम डोडियार (थाना मानगढ़) को हत्या का दोषी पाया। न्यायालय ने उसे भारतीय दण्ड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और पांच हजार रु के अर्थदण्ड से दण्डित किया है।
अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि घटना 29 नवंबर 2021 की है। सूचनाकर्ता प्रकाश ने पुलिस को सूचना दी थी कि खेड़ीकला रोड खाखरे का माल, धोलावाड़ डेम के ऊपर ग्राम उमर में एक व्यक्ति का शव पाइप लाइन के पास पड़ा है। लाश का आधा हिस्सा अनाज भरने वाली प्लास्टिक की बोरी में भरा हुआ था और उसके ऊपर एक हीरो मोटरसाइकिल (MP 43 DY 7067) पड़ी हुई थी।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर देखा तो मृतक उम्र करीब 25-26 वर्ष का गला किसी धारदार हथियार से रेता गया था और उसके पंजे व गुप्तांग पर भी चोटें थीं। मृतक की पहचान वालचन्द्र डोडियार के रूप में हुई थी। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर थाना रावटी में धारा 302, 201 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
खेत में मिलते देख लिया था, इसलिए उतारा मौत के घाट
जांच के दौरान पुलिस ने 1 दिसंबर 2021 को संदेही राजेश मईड़ा को गिरफ्तार किया। पूछताछ में राजेश ने जुर्म कबूल करते हुए बताया कि उसकी पत्नी का मृतक वालचंद के साथ प्रेम प्रसंग था। घटना के दिन वालचंद उसकी पत्नी से मिलने भूरीघाटी आया था, जिन्हें आरोपी ने खेत में मिलते हुए देख लिया था।
आरोपी को देखकर उसकी पत्नी तो वहां से भाग गई, लेकिन गुस्से में आकर राजेश ने दराते से गला काटकर वालचंद की हत्या कर दी। इसके बाद उसने अपने साथी विकास की मदद से लाश को बोरी में भरा और धोलावाड़ जंगल में रोड किनारे मोटरसाइकिल सहित फेंक दिया, ताकि यह हादसा लगे। वारदात के बाद तीसरा आरोपी मुकेश, राजेश और विकास को अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले गया था।
वैज्ञानिक साक्ष्य और DNA रिपोर्ट बनी सजा का आधार
पुलिस ने आरोपी राजेश की निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल धारदार हथियार (दराता) और खून से सने कपड़े जब्त किए थे। पुलिस द्वारा जब्त किए गए हथियारों और कपड़ों का DNA परीक्षण करवाया गया था, जो न्यायालय में अभियोजन का मजबूत वैज्ञानिक साक्ष्य बना।
दो आरोपी संदेह का लाभ पाकर हुए बरी
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने माननीय न्यायालय के समक्ष पुख्ता मौखिक, दस्तावेजी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य पेश किए। न्यायालय ने समस्त साक्ष्यों और डीएनए रिपोर्ट के आधार पर मुख्य आरोपी राजेश मईड़ा को धारा 302 में दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। वहीं, मामले के दो अन्य सह-अभियुक्तों—विकास मईड़ा और मुकेश मईड़ा—के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने के कारण माननीय न्यायालय ने उन्हें संदेह का लाभ (Benefit of Doubt) देते हुए दोषमुक्त (बरी) कर दिया।


