रतलाम / फर्जी फर्म के नाम पर ₹17 लाख का बैंक लोन ऐंठने वाले आरोपी को सात साल की कैद
रतलाम,25 अगस्त(इ खबर टुडे)। फर्जी फर्म और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए बैंक से ₹17 लाख का ऋण प्राप्त करने के मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी जाकिर हुसैन (55 वर्ष), निवासी पी.एन.टी. कॉलोनी रतलाम, को धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का दोषी पाते हुए 7 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹16,000 अर्थदंड की सजा सुनाई है।
योजना के नाम पर बैंक से ली राशि
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी जाकिर हुसैन ने अपनी बेटी और सह-आरोपी ऐहतेशाम बानो के साथ मिलकर 'प्रधानमंत्री रोजगार गारंटी योजना' के तहत दौना-पत्तल निर्माण इकाई लगाने के नाम पर लोन का आवेदन दिया था। बैंक ने प्रक्रिया के बाद ₹17 लाख का ऋण स्वीकृत किया। आरोपी ने मशीनरी खरीदने के लिए इंदौर स्थित “निक्की ट्रेडर्स” के नाम से कोटेशन प्रस्तुत किया।
जांच में खुली फर्जीवाड़े की पोल
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) और पुलिस जांच में सामने आया कि इंदौर के साँवेर रोड स्थित पते पर निक्की ट्रेडर्स नाम की कोई फर्म अस्तित्व में ही नहीं थी। आरोपी जाकिर हुसैन ने खुद को निक्की ट्रेडर्स का प्रोपराइटर दर्शाते हुए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में खाता खुलवाया और लोन की पूरी राशि मशीनरी खरीदने के बजाय अन्य काम में इस्तेमाल कर ली।
अदालत का फैसला
न्यायालय ने अभियोजन (अपर लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान) द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी में दोषी माना। अदालत ने धारा 467 और 471 में अधिकतम 7-7 वर्ष तथा अन्य धाराओं में 5-5 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। मामले की सह-आरोपी ऐहतेशाम बानो फिलहाल फरार है।

