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रतलाम / दो साल से भटक रहा 45% दिव्यांग, छह महीने की दस्तावेजी कार्रवाई के बाद भी नहीं मिली पारिवारिक पेंशन

मप्र सिविल सेवा पेंशन नियमों के तहत पात्रता के बावजूद जिम्मेदार मौन, पीड़ित ने लगाए चक्कर काटने के आरोप
 
 

रतलाम, 02 जून (इ खबर टुडे)। शासन द्वारा दिव्यांगों के कल्याण और उन्हें त्वरित न्याय देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। स्थानीय कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में मंगलवार को एक ऐसा ही मामला सामने आया, जहां 45 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता से पीड़ित एक बेबस बेटा पिछले दो साल से अपने हक की पारिवारिक पेंशन के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। छह महीने से लगातार लिखित व दस्तावेजी कार्रवाई करने के बावजूद विभाग मौन साधे बैठा है।

​रतलाम निवासी पीड़ित अभिषेक कुलश्रेष्ठ ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय मदन गोपाल कुलश्रेष्ठ शासकीय सेवा में व्याख्याता (Lecturer) थे। पिता के निधन के बाद उनकी माता स्वर्गीय श्रीमती पुष्पा कुलश्रेष्ठ को नियमानुसार पारिवारिक पेंशन मिल रही थी। 15 अप्रैल 2022 को माता के निधन के बाद से यह पेंशन बंद है।

​अभिषेक कुलश्रेष्ठ स्वयं 'सर्वाइकल कंप्रेसिव मायलोपैथी विद रेसिडुअल क्वाड्रीपैरेसिस' नामक गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं और 45 प्रतिशत स्थायी दिव्यांग हैं। वे मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के नियम 47(6) के अंतर्गत 'दिव्यांग आश्रित पारिवारिक पेंशन' के पूर्ण हकदार हैं।

​चार बार जनसुनवाई में पहुंचे, पर सिर्फ मिला आश्वासन
​पीड़ित अभिषेक के लिए शारीरिक अक्षमता के कारण बार-बार सरकारी दफ्तरों की सीढ़ियां चढ़ना किसी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से कम नहीं है। इसके बावजूद वे न्याय की आस में पिछले दो महीनों में चार बार (05 मई, 12 मई, 19 मई और आज 02 जून को) व्यक्तिगत रूप से कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में उपस्थित हुए।

​प्रशासनिक परिपत्र का बहाना, भविष्य अधर में
​पीड़ित का आरोप है कि संबंधित विभाग मामले का निराकरण करने के बजाय एक प्रशासनिक परिपत्र का हवाला देकर फाइल को दबाए बैठा है। नियमत विभाग को सबसे पहले तथ्यों और चिकित्सकीय अभिलेखों की वस्तुनिष्ठ जांच करनी चाहिए थी, जो अब तक नहीं की गई।

​दो मासूम बच्चों के भविष्य पर संकट
​लंबे समय से पेंशन प्रकरण लंबित रहने के कारण कुलश्रेष्ठ का परिवार गंभीर आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से गुजर रहा है। उनके दो नाबालिग बच्चों की पढ़ाई और भविष्य भी इस कछुआ चाल प्रशासनिक व्यवस्था की भेंट चढ़ रहा है। पीड़ित ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के प्रावधानों के तहत उनके प्रकरण का शीघ्र और निष्पक्ष निस्तारण कर न्याय प्रदान किया जाए।

Complent man

​"मैं पिछले दो साल से विभागीय कार्यालयों के चक्कर काट रहा हूँ। दिसंबर 2025 से विधिवत आवेदन, अनुस्मारक (Reminders), सीएम हेल्पलाइन, आरटीआई (RTI) और प्रथम अपील तक कर चुका हूँ। लेकिन आज तक न तो मेरी चिकित्सकीय स्थिति का प्रारंभिक परीक्षण किया गया और न ही विभाग ने कोई स्पष्ट आदेश जारी किया।"
— अभिषेक कुलश्रेष्ठ, पीड़ित