ऑपरेशन मुस्कान: रतलाम पुलिस की बड़ी उपलब्धि; 19 माह में 830 बच्चों को परिजनों से मिलाया
रतलाम, 02मई (इ खबर टुडे)। पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार और पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के कुशल नेतृत्व में रतलाम पुलिस ने 'ऑपरेशन मुस्कान' के तहत मानवीय संवेदनाओं और कार्यकुशलता की मिसाल पेश की है। पिछले 19 महीनों में पुलिस ने कुल 830 गुमशुदा व अपहृत बच्चों (64 बालक और 766 बालिकाएं) को देश के विभिन्न राज्यों से सुरक्षित दस्तयाब कर उनके परिवारों के चेहरों पर खुशियाँ लौटाई हैं।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विवेक कुमार और समस्त अनुविभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में 01 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक एक विशेष अभियान चलाया गया। इस एक माह की अवधि में पुलिस टीमों ने तकनीक और मुखबिर तंत्र की मदद से 62 बालिकाओं और 02 बालकों सहित कुल 64 बच्चों को बरामद किया। इन बच्चों को मध्य प्रदेश के साथ-साथ गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से खोज निकाला गया।
आंकड़ों में रतलाम पुलिस की सफलता (2015-2026)
रतलाम पुलिस का गुमशुदा बच्चों को खोजने का ट्रैक रिकॉर्ड देश के बेहतरीन प्रदर्शनों में से एक है। वर्ष 2015 से 2026 तक बालिकाओं की औसत दस्तयाबी दर 98.14% रही है।
वर्षवार आज की स्थिति में
▪️वर्ष 2015 में 100 प्रतिशत दस्तियाबी रही
▪️वर्ष 2016 में 99.07 प्रतिशत दस्तियाबी रही
▪️वर्ष 2017 की 99.67प्रतिशत दस्तियाबी रही
▪️वर्ष 2018 की 100 प्रतिशत दस्तियाबी रही
▪️वर्ष 2019 की 99.25प्रतिशत दस्तियाबी रही
▪️वर्ष 2020 की 100 प्रतिशत दस्तियाबी रही
▪️वर्ष 2021 की 99.67 प्रतिशत दस्तियाबी रही
▪️वर्ष 2022 की 99.42 प्रतिशत दस्तियाबी रही
▪️वर्ष 2023 की 98.83 प्रतिशत दस्तियाबी रही
▪️वर्ष 2024 की 99.46 प्रतिशत दस्तियाबी रही
▪️वर्ष 2025 की 96.76 प्रतिशत दस्तियाबी रही
▪️वर्ष 2026 की 75.81 प्रतिशत दस्तियाबी रही
साइबर सेल और विशेष टीमों की मुख्य भूमिका
इस सफलता के पीछे साइबर सेल, जेएबी शाखा और थाना स्तर पर गठित विशेष टीमों का कड़ा परिश्रम है। पुलिस ने परिजनों के बयानों और तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) का बारीकी से उपयोग किया, जिससे बच्चों तक पहुँचना संभव हो सका। दस्तयाबी के बाद सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर बच्चों को उनके माता-पिता के सुपुर्द किया गया।
रतलाम पुलिस द्वारा आमजन से अपील की गई है कि किसी भी बालक/बालिका के गुम होने की स्थिति में तत्काल निकटतम पुलिस थाना, डायल 112 अथवा साइबर सेल से संपर्क करें, जिससे समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

