रतलाम कोर्ट का बड़ा फैसला: 14 लाख के चेक बाउंस मामले में 6 माह की जेल और 23 लाख से अधिक अर्थदंड
रतलाम,27 अप्रैल (इ खबर टुडे)। जिले की एक स्थानीय अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े एक पुराने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को कारावास और भारी जुर्माने की सजा सुनाई है। रतलाम की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सपना कनोडिया ने इस मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी श्रीमन नारायण अग्रवाल को दोषी करार दिया और उसे 6 महीने के सश्रम कारावास की सजा से दंडित किया। साथ ही, न्यायालय ने आरोपी को आदेश दिया है कि वह परिवादी को चेक की राशि और ब्याज मिलाकर कुल 23,13,500 रुपये का भुगतान करे।
यह पूरा मामला वर्ष 2014 से शुरू हुआ था, जब अलकापुरी निवासी परिवादी श्रीमती सरिता गुप्ता और आरोपी श्रीमन नारायण अग्रवाल के बीच खजुराहो में एक जमीन को लेकर सौदा हुआ था। आरोपी ने स्वयं को जमीन का मालिक बताकर 13 लाख रुपये नकद प्राप्त किए थे और यह वादा किया था कि यदि रजिस्ट्री नहीं हो पाती है, तो वह तय समय में यह रकम दोगुनी करके लौटा देगा। लंबे समय तक रजिस्ट्री न होने पर, जब परिवादी ने अपनी रकम वापस मांगी, तो आरोपी ने ब्याज सहित 28 लाख रुपये लौटाने का समझौता किया और इसके लिए अलग-अलग बैंकों के चेक जारी किए।
विवाद तब बढ़ा जब परिवादी ने 14 लाख रुपये की कुल राशि वाले 5 चेक पंजाब नेशनल बैंक की रतलाम शाखा में जमा किए, लेकिन ये सभी चेक "खाते में पर्याप्त राशि न होने" (Funds Insufficient) के कारण बाउंस हो गए। इसके बाद परिवादी श्रीमती सरिता गुप्ता ने अपने अधिवक्ता संतोष त्रिपाठी के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन आरोपी द्वारा राशि का भुगतान न किए जाने पर अदालत में परिवाद पेश किया गया।
सुनवाई के दौरान आरोपी ने अपने बचाव में तर्क दिया कि उसने केवल खाली चेक दिए थे और उन पर उसके हस्ताक्षर नहीं थे। हालांकि, अदालत ने सभी साक्ष्यों और दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद आरोपी के तर्कों को खारिज कर दिया। न्यायालय ने परिवादी अधिवक्ता संतोष त्रिपाठी द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और तर्कों से सहमत होते हुए अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि चेक कानूनी देनदारी के निपटान के लिए दिए गए थे और उनका अनादर होना कानूनन अपराध है। सजा सुनाते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि आरोपी मुआवजे की राशि 23,13,500 रुपये जमा करने में विफल रहता है, तो उसे 2 महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।

