रतलाम अदालत का बड़ा फैसला: जमीन विवाद में तलवार-सरिये से हमला करने वाले 5 दोषियों को 7-7 साल की जेल
रतलाम,02 सितंबर(इ खबर टुडे)। जमीन के मामूली विवाद को लेकर एक परिवार पर तलवार, लोहे के सरिये और लाठियों से जानलेवा हमला करने वाले पांचों आरोपियों को अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश रतलाम श्री राजेश नामदेव के न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए सभी पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए 7-7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने बताया कि घटना 23 अक्टूबर 2019 की सुबह बिलपांक थाना क्षेत्र के ग्राम कुड़ीपाड़ा की है। फरियादी धूलीबाई के पति सोना की 14 बीघा जमीन को लेकर पहली पत्नी के रिश्तेदार विवाद कर रहे थे। इसी रंजिश में पांचों आरोपियों—बाबू भाभर, नानालाल उर्फ नानजी, चम्पालाल, राधेश्याम और देवराम—ने एक राय होकर धूलीबाई की बेटी सुभद्रा और दामाद नरसींग पर घातक हथियारों से हमला कर दिया।
आरोपी बाबू भाभर ने नरसींग के सिर पर तलवार से वार किया, जिससे उसे गंभीर चोट आई और अहमदाबाद में उसके सिर का ऑपरेशन करना पड़ा। अन्य आरोपियों ने लोहे के सरिये और लाठियों से मारपीट कर घायलों की हड्डियां तोड़ दीं। बचाने आई धूलीबाई के साथ भी मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी दी गई।
वैज्ञानिक साक्ष्य और गवाहों ने निभाई मुख्य भूमिका
मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर हथियार और खून से सने कपड़े जब्त किए थे। FSL (फॉरेंसिक) रिपोर्ट में आरोपी और पीड़ितों के कपड़ों पर मानव रक्त पाया गया, जिसने अभियोजन पक्ष के दावे को मजबूती दी। अदालत ने घायलों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों व मेडिकल रिपोर्ट को पूरी तरह विश्वसनीय माना।
आर्म्स एक्ट में भी दोषी
न्यायालय ने माना कि हमले में इस्तेमाल की गई तलवार प्रतिबंधित श्रेणी की थी और आरोपी बाबू भाभर के पास इसका कोई वैध लाइसेंस नहीं था। इस पर उसे आयुध अधिनियम (आर्म्स एक्ट) के तहत भी दोषी ठहराया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि घातक हथियारों से किया गया यह हमला बेहद गंभीर अपराध है, जिसके लिए दोषियों को जेल भेजा जाना आवश्यक है।

