अब आरबीआई करेगा किसान व कर्मचारियों की पेमेंट, बैंक होंगे बाहर, ई कुबेर होगा लांच

हरियाणा में जल्द ही किसानों व कर्मचारियों की पेमेंट बैंक की बजाय आरबीआई द्वारा सीधे की जाएगी। अन्य राज्यों की तर्ज पर अब प्रदेश में भी ई-कुबेर (अर्बन को-आपरेटिव बैंक) को लांच होगा। प्रदेश में अंबाला से इसकी शुरुआत 15 अप्रैल से की जाएगी। इसके बाद अन्य जिलों में भी इसे लांच कर दिया जाएगा। इसके लिए ट्रेजरी के कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दिला दी गई है। ई-कुबेर लांच होने से ट्रेजरी और विभागों के बीच से बैंकों को हटा दिया जाएगा।
इस बार गेहूं के सीजन में किसानों की जितनी भी पेमेंट होगी वह बैंक के माध्यम से न होकर ई-कुबेर से ही होगी। ऐसे में कायस लगाए जा रहे हैं कि इस बार अंबाला के किसानों को अपनी गेहूं की राशि का भुगतान जल्द मिल जाएगा।
विभाग से बिल जनरेट होने के बाद फिजिकल बिल ट्रेजरी और ट्रेजरी से ई-कुबेर के जरिए सीधे रिजर्व बैंक से उसकी पेमेंट हो जाएगी। पहले फिजिकल बिल ट्रेजरी में आने के बाद ट्रेजरी उसका ईपीएस यानि इलेक्ट्रानिक पेमेंट सिस्टम नंबर जारी करता था फिर डीडीओ की डोंगल से वेरिफाई करवाने के बाद ट्रेजरी के ईपीएस को बैंक में देना पड़ता था और
बैंकों की बजाए सीधे रिजर्व बैंक से होगी सभी विभागों की पेमेंट, सरकार के सालाना बचेंगे करोड़ों रुपये
अभी प्रत्येक एंट्री पर बैंक को देने पड़ते हैं 45 रुपये
वर्तमान में प्रत्येक एंट्री करने पर बैंक को सरकार 45 रुपये देती है यानि एक बिल की पेमेंट करवाने पर 45 रुपये देती है। अंबाला जिले की बात करें तो हर महीने औसतन 1250-1300 बिल ट्रेजरी से पास होकर बैंक में जाते थे। इस तरह हर महीने करीब 56 हजार 250 से 58500 और सालाना औसतन करीब 6.75 लाख रुपये लेकर करीब सात लाख रुपये केवल अंबाला से बचेंगे।
बैंक के माध्यम से बिल पास होता था। ई-कुबेर लांच होने से बैंक वाला सारा काम ट्रेजरी और रिजर्व बैंक ही करेगा।
जिला खजाना विभाग अधिकारी सुनीता गोस्वामी ने कहा कि 15 अप्रैल से अंबाला प्रदेश का पहला ऐसा जिला बन जाएगा जहां ई-कुबेर लांच होगी। इसके बाद पूरे प्रदेश में इसे लागू कर दिया जाएगा। इस प्रक्रिया में ट्रेजरी और रिजर्व बैंक के बीच मध्यस्थता कर रहे बैंकों को बीच से हटा दिया जाएगा। बैंक वाली सारी प्रक्रिया ट्रेजरी करेगी और पेमेंट सीधे रिजर्व बैंक के माध्यम से होगी।
ट्रेजरी से ही बिल पास होंगे और ट्रेजरी से ही रुपये भी रिजर्व बैंक के माध्यम से सीधे संबंधित विभाग के खाते में