मंदसौर के नारकोटिक्स उपनिरीक्षक को रिश्वत मामले में 5 साल की सजा, प्रकरण में नाम आने पर मांगे थे पांच लाख रुपए
मंदसौर, 26 फरवरी (इ खबर टुडे)। मंदसौर में रिश्वत लेने के मामले में आरोपी मधुसूदन पाठक, तत्कालीन उपनिरीक्षक, Central Bureau of Narcotics (CBN) को दोषी करार देते हुए न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने 5 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। आरोपी को अधिनियम की धारा 13(1)(डी) के तहत 5 वर्ष की सजा व 25 हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 8 के तहत 4 वर्ष की सजा एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
अभियोजन मीडिया प्रभारी एवं सहायक जिला अभियोजन अधिकारी बलराम सोलंकी के अनुसार, 30 जुलाई 2016 को नारकोटिक्स प्रकोष्ठ मंदसौर विंग इंदौर द्वारा राजस्थान निवासी सुखलाल कुमावत के विरुद्ध अफीम प्रकरण दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान सुखलाल ने पप्पू पंडित उर्फ कमलदास बैरागी का नाम लिया।
प्रकरण की जांच के दौरान आरोपी उपनिरीक्षक मधुसूदन पाठक ने आवेदक मुकेश बैरागी निवासी मिडलाखेड़ा, जिला मंदसौर से संपर्क कर उसके पिता कमलदास बैरागी का नाम केस में आने की बात कही और उन्हें बचाने के लिए 5 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। बाद में यह राशि 2 लाख 50 हजार रुपये में तय हुई।

हालांकि यह मामला CBN का न होकर नारकोटिक्स प्रकोष्ठ मंदसौर विंग इंदौर द्वारा जांच किया जा रहा था। फरियादी मुकेश बैरागी रिश्वत नहीं देना चाहता था और उसने आरोपी को रंगे हाथ पकड़वाने की योजना बनाई। योजना के अंतर्गत उसने में 8 अगस्त 2016 को उसने लोकायुक्त पुलिस उज्जैन में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर 11 अगस्त 2016 को निरीक्षक कमल निगवाल के नेतृत्व में ट्रैप कार्रवाई की गई, जिसमें आरोपी मधुसूदन पाठक को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। आवश्यक अनुसंधान के बाद 9 अगस्त 2019 को न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया।
प्रकरण में शासन की ओर से सहायक निदेशक अभियोजन गजराज सिंह चौहान एवं विशेष लोक अभियोजक रमेश गामड़ ने पैरवी की। न्यायालय के निर्णय से भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त संदेश गया है।

