Mandsaur News: 84 लाख रुपए में स्टेडियम तो बनवा दिया,लेकिन खिलाड़ी अब भी खेतों में ही खेलते हैं क्रिकेट
Mandsaur News: नगर परिषद ने शासन की योजना के तहत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में 84 लाख रुपए में खेल स्टेडियम बनवाया है। इसका निर्माण लगभग पूरा हो चुका है लेकिन स्कूल भवन से सटे होने और पर्याप्त जगह न होने से क्रिकेट खेलने में परेशानी आ रही है। इस कारण नगरी प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट के आयोजकों और खिलाड़ियों को खेत में मैदान बनाकर टूर्नामेंट करवाना पड़ रहा है।
खिलाड़ियों का कहना है कि स्टेडियम से स्कूल भवन जुड़ा हुआ है। मैदान भी छोटा है। स्कूल प्रशासन स्कूल के छात्र-छात्राओं के अलावा किसी को खेलने की अनुमति नहीं देता। ऐसे में क्रिकेट खिलाड़ियों को खेतों में ही अभ्यास और टूर्नामेंट करवाना पड़ रहा है।
एनपीएल टूर्नामेंट के आयोजक देवेंद्र अटोलिया, सुरेश टेलर और श्याम सुंदर अटोलिया ने बताया कि खिलाड़ियों ने शुरू से ही स्टेडियम निर्माण की जगह का विरोध किया था। 13 मई 2022 को खिलाड़ियों ने पटलावद मार्ग पर आरक्षित खेल मैदान पर स्टेडियम बनाने की मांग को लेकर कलेक्टर के नाम ज्ञापन नगर परिषद सीएमओ को सौंपा था। इसके बाद 2 जून 2023 को फिर से ज्ञापन देकर स्कूल मैदान में स्टेडियम निर्माण रोकने की मांग की गई थी। बावजूद इसके नगर परिषद ने खिलाड़ियों की बात नहीं मानी और स्कूल परिसर में ही स्टेडियम बना दिया।
अलग मैदान बनाने पर बैठक में विचार करेंगे
नगर परिषद अध्यक्ष संगीता बग्गड़ ने कहा कि स्टेडियम का लाभ क्रिकेट को छोड़कर अन्य खेलों के लिए मिलेगा। रनिंग और अन्य खेलों के लिए युवा इसका उपयोग कर सकेंगे। क्रिकेट के लिए अलग मैदान बनाने पर परिषद की बैठक में विचार किया जाएगा। विधायक विपिन जैन ने कहा कि स्टेडियम निर्माण मेरे कार्यकाल से पहले हुआ। अब मैं प्रयास करूंगा कि क्रिकेट खिलाड़ियों को खेलने के लिए अलग मैदान की सुविधा मिल सके।
खेल प्रतियोगिता की इजाजत नहीं
स्कूल प्रशासन ने भी स्टेडियम निर्माण के लिए 16 जनवरी 2023 को डीईओ को भेजे पत्र में स्पष्ट किया था कि सर्वे नंबर 896 पर स्कूल भवन और मैदान स्थित है। इसलिए स्टेडियम का उपयोग केवल स्कूल के छात्र-छात्राओं के लिए किया जाएगा। बिना अनुमति किसी भी खेल प्रतियोगिता की इजाजत नहीं दी जाएगी। प्राचार्य रीता शर्मा ने कहा कि अभी तक किसी ने खेल आयोजन की अनुमति नहीं मांगी है। स्कूल भवन और सामग्री को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए शर्तों के अधीन ही अनुमति दी जा सकती है।

