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 स्पन्दन मंच की आभासीय साहित्य संध्या में गूंजीं देश-विदेश के रचनाकारों की आवाजें

 

 

भोपाल , 17 जुलाई(इ खबर टुडे)। स्थानीय साहित्यिक संस्था 'स्पन्दन मंच' के तत्वावधान में बीते कल (16 जुलाई) एक भव्य आभासीय (वर्जुअल) साहित्य संध्या का आयोजन किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय पटल पर देश के विभिन्न कोनों सहित विदेशों से भी प्रख्यात साहित्यकारों ने सहभागिता कर अपनी अनूठी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का विधिबद्ध आरंभ चेन्नई की युवा साहित्यकार मोनिका डागा द्वारा प्रस्तुत की गई मधुर सरस्वती वंदना से हुआ। मां शारदे की वंदना के बाद काव्य पाठ का सिलसिला शुरू हुआ, जिसने अंत तक समां बांधे रखा।

देश-विदेश की रचनाओं का संगम
लंदन से कार्यक्रम में ऑनलाइन जुड़े भोपाल के वरिष्ठ साहित्यशिल्पी विवेक रंजन श्रीवास्तव ने अपनी विशिष्ट रचना 'कविता' प्रस्तुत की। उन्होंने कविता के वास्तविक अर्थ को बेहद खूबसूरती से परिभाषित कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।

चेन्नई: युवा रचनाकार मोनिका डागा ने अपनी प्रभावी रचना 'मुझे अब भय नहीं लगता' के माध्यम से वर्तमान समय के साहस को स्वर दिया।

दिल्ली: दिल्ली से जुड़ीं निशि अरोड़ा की मर्मस्पर्शी रचना 'भीष्म का देह त्याग' को सुन सभा में उपस्थित सभी जन भावविभोर हो गए। वहीं दिल्ली की ही अलका गुप्ता ने अपनी लघु कविता 'मोटी सी रोटी' के जरिए स्त्रीमन की व्यथा और उसके संघर्षों का बेहद मार्मिक चित्रण किया।

गुरुग्राम: गुरुग्राम की प्रीति अग्रवाल ने अपने संस्मरण 'ईमानदारी से खेलो' के माध्यम से जीवन में ईमानदारी और नैतिक मूल्यों के महत्व पर विशेष बल दिया।

मेरठ: मेरठ से सहभागी बनीं नीलमणि ने राममंदिर में घटित एक घटना पर आधारित तीखा और आकर्षक व्यंग्य प्रस्तुत कर व्यवस्था पर कटाक्ष किया।

लखनऊ: लखनऊ की लेखिका ऋचा उपाध्याय ने अपनी गंभीर रचना 'जब भी युद्ध होता है' के माध्यम से युद्ध के विनाशकारी दुष्परिणामों और मानवीय त्रासदियों का सजीव वर्णन किया।

उज्जैन: स्पन्दन मंच के संस्थापक (उज्जैन) प्रशांत माहेश्वरी ने अपनी रचना 'वन का वीर' के जरिए एक पुष्प के जीवन संघर्ष और उसकी जीवटता को खूबसूरती से अभिव्यक्त किया।

अलीगढ़: अलीगढ़ की डॉ. आभा माहेश्वरी ने सुमधुर सुरों में कृष्ण भजन प्रस्तुत किया, जिसने पूरे माहौल को भक्तिमय और मनोहारी बना दिया।