बुरहानपुर में बारिश ने खेतों में चिंता बढ़ाई, सोयाबीन-कपास को खतरा, रबी के लिए मिलीजुली राहत
Burhanpur News: जिले में सितंबर के आखिरी सप्ताह में हो रही लगातार बारिश से कृषि पर मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। सोमवार रात शहर में तेज बरसात दर्ज की गई — 24 घंटे में शहर में 39 मिमी और पूरे जिले में औसत 20 मिमी बारिश हुई। इस वर्ष अब तक औसत बारिश का कोटा 91.30 प्रतिशत तक पूरा हुआ है, जो पिछले सालों की तुलना में कम है, लेकिन अब हो रही भारी बारिश फसलों के लिए खतरे का संकेत दे रही है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सोयाबीन और कपास की फसलें कटाई के करीब हैं और इन्हें सूखने के लिए थोड़े दिनों के तेज धूप और सुखाने की जरूरत है। कपास में अब कपास की गांठें दिखने लगी हैं और सोयाबीन में फल्लियां आ चुकी हैं। लगातार हुई नमी और खेतों में पानी जमा होने से पत्तियों पर पीला मोज़ेक दिखाई दे रहा है और पौधों के गलने का जोखिम बढ़ गया है। यदि बारिश थमती नहीं है तो फसलों की उपज और गुणवत्ता दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
वहीं दूसरी ओर, रबी फसलों के लिए यह नमी लाभदायक है। भूमि में मौजूद नमी से बिना सिंचाई के चना और गेहूं की बुआई सुगम हो जाएगी। अपेक्षित बारिश से अधूरे भरे तालाब और जलाशयों का स्तर भी बढ़ने की संभावना है, जिससे सिंचाई के विकल्पों में सुधार हो सकता है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो से तीन दिन हल्की वर्षा रहती सकती है, जबकि महीने के अंत में और अक्टूबर की शुरुआत तक कुछ तेज बरसात फिर होने की चेतावनी है।
केला फसल के लिए भी परिस्थितियाँ चिन्ताजनक हैं। जिले में जुलाई से सीएमवी (Cucumber Mosaic Virus जैसे लक्षण) का प्रभाव देखा जा रहा है और नमी व तापमान में कमी के साथ इसका प्रसार तेज हो सकता है। धान्य और सब्जियों में लंबे समय तक नमी रहने से रोग-कीटों का दबदबा बढ़ सकता है, इसलिए किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
क्षेत्रीय कृषि विज्ञान केंद्र ने बताया कि फिलहाल खेतों में पड़े पानी को सुखाने के उपाय अपनाने और फसल की नजरदारी बढ़ाने की आवश्यकता है। अचानक तेज धूप न निकलने पर पौधे समय रहते सूख नहीं पाते, जिससे रोगों का खतरा बना रहता है। विशेषज्ञों ने कहा कि जहां संभव हो, खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करें और फसल के निचले हिस्सों में दिखाई देने वाले पीले पत्तों व गलन के लक्षणों का त्वरित निरीक्षण कर इलाज आरंभ करें।
कुल मिलाकर, बारिश ने रबी की तैयारी को तो आसान बनाया है पर खरीफ की तैयार फसलें—विशेषकर सोयाबीन और कपास—संवेदनशील स्थिति में हैं। यदि अगले कुछ दिनों में मौसम साफ रहा और खेतों में नमी घटे तो फसलों को कटाई तक सुरक्षित रखा जा सकेगा, अन्यथा किसान संरक्षण और रोग-नियंत्रण के लिए कदम उठाएं। बाजार में फसल की कीमतों और गुणवत्ता पर असर पड़ने से किसान आर्थिक रूप से प्रभावित हो सकते हैं; इसलिए तुरंत समन्वित कदम आवश्यक हैं।

