Digital arrest/ 48 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रहे रिटायर्ड अफसर, फर्जी IPS बन ठगों ने हड़पे 1.12 करोड़ रुपए
ग्वालियर,12 जनवरी (इ खबर टुडे । पुलिस विभाग की ओर से कई बार आमजनता समय समय पर जानकारी दी जाती है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई भी कार्यवाही पुलिस द्वारा नहीं की जाती है। उसके बावजूद भी कई लोग इस प्रकार की धोखाधड़ी में उलझ कर अपनी मेहनत की कमाई गवा देते है। एक ऐसा ही मामला प्रदेश के ग्वालियर से सामने आया है।
जानकारी के अनुसार सेवानिवृत्त उपपंजीयक बिहारीलाल गुप्ता को 48 दिन डिजिटल अरेस्ट रख 1.12 करोड़ रुपए की साइबर ठगी हुई है। मनी लांड्रिंग केस में फंसा बताकर उन्हें 16 नवंबर से दो जनवरी तक डिजिटल अरेस्ट कर रखा गया।
मामले में रविवार शाम को एफआईआर दर्ज की गई है। साइबर क्राइम विंग की टीम ठगों के फोन नंबर और बैंक खातों के जरिये ठगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। इससे पहले पिछले साल डिजिटल अरेस्ट कर रामकृष्ण मिशन आश्रम के सचिव स्वामी सुप्रदिप्तानंद से 2.51 करोड़ की ठगी की गई थी। इसके बाद इतनी बड़ी रकम दूसरी बार डिजिटल अरेस्ट कर ठगी गई है।
जानकारी के अनुसार निवासी – 57 बी, ओल्ड खेड़ापति कालोनी में रहने वाले 75 वर्षीय बिहारी लाल गुप्ता ने पुलिस को बताया कि 16 नवंबर को 6768532494 से काल आया था। खुद को ट्राइ का अधिकारी बताकर रोहित शर्मा बताया था। कहा कि सीबीआइ से उनका नंबर और आधार कार्ड बंद करने के लिए दिया गया है क्योंकि उनका नंबर मनी लांड्रिंग केस में चिन्हित हुआ है।
कहा कि कुछ ही देर में आईपीएस अधिकारी नीरज ठाकुर का काल 8436076254 नंबर से आएगा। मैं घबरा गया। तुरंत ही इसी नंबर से वाट्स एप पर पहले वाइस काल फिर वीडियो काल आया। सामने वर्दी पहने हुए व्यक्ति बैठा था, जिसने अपना नाम नीरज ठाकुर आइपीएस अधिकारी बताया और उसके कंधे पर भी आइपीएस ही लिखा था।
उसने बताया कि मेरा नाम संदीप कुमार मनी लांड्रिंग केस में आया है। उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। कमरे में बंद रहने को कहा। कहा कि मैं पत्नी से भी बात नहीं कर सकता। पानी भी उन्हीं की मर्जी से पीने जाता था। फिर कहा कि मेरे खातों की जांच होगी। पैसा चार खातों में यह कहकर ट्रांसफर करा लिया कि जांच के बाद सही पाए गए तो वापस आ जाएंगे। इस तरह मेरे खाते से 60 लाख रुपए और पत्नी के खाते से 52 लाख रुपए ट्रांसफर कराए।
म्यूचुअल फंड में लगाई थी जीवनभर की कमाई, उसे ही हड़प लिया
बिहारी लाल गुप्ता ने जीवनभर की पूंजी म्यूचुअल फंड में लगाई थी। म्यूचुअल फंड से ही रुपए निकलवाने के बाद ठगों को दिए।
किस बैंक के किस खाता नंबर में पहुंची रकम
इंडसइंड बैंक – 201035708381 – 60 लाख रुपए
आइसीआइसीआइ बैंक – 244305000804 – 30 लाख रुपए
यूको बैंक – 05030210003541 – 22 लाख रुपए
बुजुर्ग हो इसलिए मौका दे रहे हैं, वर्ना गिरफ्तार ही करते
शातिर ठगों ने इन्हें कहा कि आप बुजुर्ग हैं, इसलिए प्री-इंवेस्टिगेशन का आर्डर दे रहे हैं। इसके लिए आईपीएस बनकर बात कर रहे ठग ने कहा कि सीबीआइ अधिकारी प्रदीप कुमार को आवेदन देना होगा। उसने ही वाट्स एप पर आवेदन मंगवाया। इसके बाद डिजिटल अरेस्ट का प्रविधान बताकर बातों में फंसा लिया।
रिजर्व बैंक की रसीद भेजते थे ठग
ठग विश्वास दिलाने के लिए रिजर्व बैंक की रसीद, उस पर सील और हस्ताक्षर कर भेजते थे।
कंबोडिया कनेक्शन आया सामने
इस मामले में भी जो काल आए, वह कंबोडिया से आए हैं। वहीं ठगी का पैसा निजी बैंकों के करंट खातों में गया है। इसके बाद भी पैसा 24 खातों में टांसफर हुआ है। यह खाते 11 राज्यों के हैं।
अधिकारियों का क्या कहना
मनीष यादव, डीएसपी, क्राइम ब्रांच का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट कर रिटायर्ड सब रजिस्ट्रार के साथ 1.12 करोड़ रुपए की ठगी हुई है। एफआइआर दर्ज कर ली गई है। जांच जारी है।

