खिवनी के बाघ युवराज के आगे के दोनों पैर और पिछले बाएं पैर में गहरे घाव मिले
उज्जैन / भोपाल, 03 जुलाई (इ खबर टुडे / ब्रजेश परमार)। देवास जिला के खिवनी अभ्यारण्य से वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल भेजे गए 11 वर्षीय घायल बाद्य युवराज का उपचार रेस्क्यू सेंटर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि बाघ के आगे के दोनों पैर और पिछले बाएं पैर में गहरे घाव हैं। एक्स-रे परीक्षण से आगे के दोनों पंजों में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई है। उसके पिछले बाएं पैर में गहरा घाव होने के कारण छह टांके लगाए गए हैं।
देवास के खिवनी अभ्यारण्य का यह बाद्य पर्यटकों की पहली पसंद बन गया था। हाल ही में घायल स्थिति में देखे जाने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बाघ को 27 जून को रेस्क्यू कर वन विहार भेजा गया था। शुक्रवार को उसकी स्थिति का विस्तृत चिकित्सकीय परीक्षण राज्य पशु चिकित्सालय, जहांगीराबाद के वरिष्ठ वेटरनरी सर्जन डॉ. एस.के. तुमड़िया, वन विहार के वरिष्ठ वन्य प्राणी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अतुल गुप्ता तथा वन विहार के पशु चिकित्सक डॉ. विनीत द्वारा किया गया। उपचार के दौरान बाघ की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और स्वास्थ्य स्थिति के अनुरूप आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल की जा रही है। डॉ. अतुल गुप्ता घायल बाघ की स्थिति की निरंतर निगरानी कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान वन विहार के संचालक विजय कुमार, सहायक संचालक डॉ. रूही हक तथा सफारी प्रभारी श्रीमती सीता काकोड़िया भी उपस्थित रहीं।
वर्चस्व की जंग में हारा था युवराज
देवास जिला अंतर्गत खिवनी वन्य जीव अभ्यारण्य में 11वर्षीय बाद्य युवराज का राज चलता था। 27 जून को उसे अभ्यारण्य में घायल अवस्था में लंगडाते हुए देखा गया था। उसके बाद उसे तत्काल ही एक रेस्क्यू आपरेशन के तहत भोपाल के वन विहार ले जाया गया था। युवराज एवं मादा बाद्य मीरा की जोडी खिवनी में आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण थी एवं यहां वंश वृद्घि को अंजाम दे रही थी। खिवनी अभ्यारण्य अधीक्षक विकास माहौर के अनुसार संभवत: नए बाद्य से वर्चस्व की लडाई के दौरान युवराज घायल हुआ। उसकी उम्र करीब 10-11 वर्ष थी। वैसे विभाग में बाद्यों के नाम टी-1 या इस तरह से रहते हैं।
हमारे यहां नाम बहुत कम ही रखे जाते हैं। ये भी संभव है कि मेटिंग के सीजन में नई मादा बाद्य के साथ आए नए बाद्य और इसके बीच वर्चस्व की जंग हुई हो। भोपाल कालियासोत से लेकर,सिहोर से बाद्यों का मुवमेंट खिवनी में होता है। खिवनी पिछले 8-10 सालों में बाद्यों के लिए प्राकृतिक प्रजनन केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। श्री माहौर के अनुसार वन्यजीव व्यवहार के अनुसार, वर्चस्व की लड़ाई में बाघ हमेशा एक-दूसरे के पंजों को निशाना बनाते हैं। इससे प्रतिद्वंदी शिकार नहीं कर पाता।
उम्रदराज होने के कारण युवराज नए युवा बाघ की फुर्ती का मुकाबला नहीं कर सका। उसके नाखून टूट गए। उसके पैर डैमेज हो गए। वह शिकार करने और चलने में काफी परेशानी महसूस कर रहा था। उसकी घायलावस्था को देखते हुए ही अभ्यारण्य प्रबंधन ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर उसे वन विहार की टीम के साथ भोपाल भेजने के लिए रेस्क्यू किया था। वन विभाग के रेस्क्यू आपरेशन के दौरान भी नये बाद्य ने नजदीक में ही दस्तक दी थी। तत्काल ही दल ने उसे वहां से भगा दिया था। अधीक्षक श्री माहौर ने इस बात की पुष्टि की थी।

