प्रदेश की 454 मदिरा दुकानों की नीलामी पर संकट,सरकार चलाएगी मदिरा दुकाने
रतलाम / भोपाल,4 अप्रैल (इ खबर टुडे)। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत हो चुकी है और चार दिन गुजर बावजूद प्रदेश में मदिरा दुकानों की नीलामी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। आबकारी विभाग द्वारा जारी 12 वें दौर की रिपोर्ट के अनुसार,प्रदेश की करीब 454 मदिरा दुकानों को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। रतलाम जिले की भी कई दुकाने अभी अटकी हुई है। इन दुकानों के लिए शासन द्वारा नई नीति बनाने की तैयारी की जा रही है।
अब तक की नीलामी में 34% का उछाल
प्रदेश के आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना से प्राप्त जानकारी के मुताबिक राज्य में ई-टेंडर के माध्यम से दुकानों के निष्पादन की प्रक्रिया में 12वें दौर की समाप्ति तक प्रदेश की 3,099 दुकानों से सरकार को कुल 16,637.85 करोड़ का राजस्व मिलना सुनिश्चित हो चुका है। यह राशि पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) के वार्षिक मूल्य 12,404.73 करोड़ की तुलना में 34.13% अधिक है।
इस साल की नीलामी की सबसे बड़ी सफलता ठेकेदारों की संख्या में वृद्धि रही। शराब ठेकेदारों की संख्या 489 से बढ़कर 860 हो गई है, जिससे शराब बाजार में वर्षों से चला आ रहा 'एकाधिकार' (Monopoly) खत्म हुआ है।
454 दुकानों पर नहीं मिल रहे खरीदार
प्रदेश की 3,099 दुकानों के निष्पादन के बावजूद विभाग के सामने 454 दुकानों को नीलाम करना बड़ी चुनौती बना हुआ है। इन दुकानों के लिए आए ऑफर आरक्षित मूल्य (RP) से काफी कम हैं। 12वें दौर में 193 दुकानों के लिए आरक्षित मूल्य से 30% नीचे तक के ऑफर मिले। 454 दुकानों में से 215 दुकानें ऐसी हैं जहाँ ठेकेदारों ने 50% से भी कम की बोली लगाई है, जबकि 106 दुकानों पर 30-40% कम के ऑफर मिले हैं। 1 दुकान पर तो कोई ऑफर ही प्राप्त नहीं हुआ।
मंत्रिमंडल उप-समिति की बैठक: 'सरकारी निगम' चलाने का सुझाव
नीलामी के इन पेचीदा आंकड़ों को देखते हुए उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में 'मंत्रिमंडल उप-समिति' की उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय इस प्रकार हैं।
30% की लक्ष्मण रेखा: समिति ने निर्णय लिया है कि आरक्षित मूल्य से 30% से नीचे के ऑफर स्वीकार नहीं किए जाएंगे। कम बोली के कारण फिलहाल 454 दुकानों के ऑफर 'होल्ड' पर रखे गए हैं।
13वें दौर की तैयारी: अब 13वें चरण में पुनः ई-टेंडर बुलाए जाएंगे, जिसमें ऑफसेट प्राइस आरक्षित मूल्य से अधिकतम 30% नीचे तक ही रखी जाएगी। इस चरण में भी ऑक्शन (बोली) नहीं, बल्कि केवल टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
विभागीय संचालन (Sarkari Shops): बैठक में उपस्थित स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जिन दुकानों के लिए 30% से भी कम के ऑफर मिल रहे हैं, उन्हें ठेकेदारों को औने-पौने दाम पर देने के बजाय सरकार को एक 'निगम' गठित कर खुद चलाना चाहिए। उपमुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव के परीक्षण के निर्देश दिए हैं।
आ सकता है नया मॉडल
सरकार जहाँ 34% राजस्व वृद्धि के साथ मुनाफे में दिख रही है, वहीं 454 दुकानों पर लगा गतिरोध विभाग की चिंता बढ़ा रहा है। यदि 13 वें दौर में भी ठेकेदार ऊंची बोली नहीं लगाते हैं, तो मध्यप्रदेश में 'सरकारी शराब दुकान' का नया मॉडल देखने को मिल सकता है।
नीलामी का संक्षिप्त सारांश (03.04.2026 तक):
कुल नीलाम दुकानें: 3,099
* कुल प्राप्त राजस्व: 16,637.85 करोड़
* राजस्व वृद्धि (v/s 2025-26): 34.13%
* शेष दुकानें (Hold पर): 454
* ठेकेदारों की संख्या: 860 (गत वर्ष 489)

