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गैर सरकारी समिति मंदिर परिसर में बैठकर काट रही रसीद,नकदी,सोना-चांदी ले रहे दान

मां बगलामुखी मंदिर के दान में सेंध का आरोप ,कलेक्टर ने जांच समिति बनाई
 
जिला पंचायत सीईओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति 7 दिन में जांच कर प्रतिवेदन देगी

उज्जैन,07 ,जुलाई(इ खबर टुडे/ब्रजेश परमार)। आगर-मालवा जिले के नलखेडा में स्थित प्रसिद्ध तांत्रिक मां बगलामुखी मंदिर के दान में सेंध का आरोप लगने की स्थिति सामने आने के बाद कलेक्टर प्रिती यादव ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई है। यह समिति 7 दिन में अपना प्रतिवेदन कलेक्टर को देगी। मामले में प्रारंभिक रूप से एक गैर सरकारी समिति के खुलेआम मंदिर में सोने-चांदी के आभूषण एवं नकदी दान में लेने की जानकारी सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया है।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर के दान में वर्ष 2018 में गणना के दौरान चोरी के बाद,अयोध्या के राम मंदिर,बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम में चढ़ावा चोरी के मामले सामने आए हैं। इसी क्रम में नलखेडा के प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर के दान में भी सेंध की स्थिति सामने आई है। मंदिर की आधिकारिक सरकारी प्रबंध समिति को दरकिनार कर परिसर के भीतर एक गैर-सरकारी समिति के खुले रूप से सोने-चांदी के आभूषणों के दान लेने का मामला सामने आने पर कलेक्टर ने समिति बनाकर जांच का कदम उठाया है। 

सामने आए साक्ष्यों के अनुसार, नलखेड़ा की ही एक समिति को 2024 में तत्कालीन एसडीएम एवं मां बगलामुखी प्रबंध समिति के अध्यक्ष मिलिंद ढोके के संरक्षण में मंदिर के गर्भगृह के भीतर पैर जमाने का मौका मिला था। तब से लेकर अब तक यह समिति बिना किसी कानूनी अधिकार के मंदिर के अंदर अपनी रसीद काटकर दान ले रही थी। समिति दान पत्र के नाम पर रसीद बुक छपवाकर इसके माध्यम से अपना काम कर रही थी। गैर सरकारी संस्था की  रसीद पर बकायदा एक निजी बैंक का खाता नंबर और कई लोगों के मोबाइल नंबर भी दर्ज हैं।

नियमों के मुताबिक मां बगलामुखी मंदिर पूरी तरह शासन के नियंत्रण में है और इसकी व्यवस्था संभालने के लिए एक आधिकारिक प्रबंध समिति गठित है, जिसके अध्यक्ष स्थानीय एसडीएम हैं। सरकारी नियम कायदों को ताक पर रखकर मंदिर के भीतर किसी भी अन्य निजी संस्था द्वारा सीधे दान या आभूषण स्वीकार नहीं किया जा सकता है। पिछले दो वर्षों में समिति की और से अब तक लाखों रुपए मूल्य के सोने और चांदी के आभूषण एवं नगदी लिए जा चुके हैं। गंभीर बात यह है कि इस अकूत चढ़ावे का कोई भी हिसाब-किताब न तो सरकारी प्रबंध समिति के पास है और न ही अवैध रूप से काम कर रही यह निजी सुदर्शन सेवा समिति इसका कोई सार्वजनिक ब्यौरा दे रही है।

इस पूरे मामले में मंदिर समिति के बाहर के लोगों की सक्रिय भूमिका सामने आ रही है। चौंकाने वाले तथ्य यह है कि यह लोग खुद मंदिर की आधिकारिक व्यवस्था या पुजारी पैनल में कहीं भी पंजीकृत नहीं है। इसके बावजूद वह मंदिर परिसर के भीतर बैठकर इस पूरी समानांतर व्यवस्था को बेखौफ होकर संचालित कर रहे है। बिना किसी ऑडिट और बिना किसी सरकारी निगरानी के हो रही इस लाखों की वसूली ने मंदिर की सुरक्षा और पारदर्शिता दोनों पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। गैर शासकीय समिति के दान लेने के आरोपों और शिकायतों के आधार पर कलेक्टर श्रीमती प्रीति यादव ने एक जांच समिति गठित की है।

तीन सदस्यीय जांच समिति मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बी.एस. सोलंकी की अध्यक्षता में जांच को अंजाम देगी। इसमें जिला कोषालय अधिकारी मनीष सोलंकी एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी नलखेड़ा मिनी अग्रवाल सदस्य बनाए गए हैं। जांच दल 7 दिवस के भीतर मंदिर परिसर का निरीक्षण कर दान-संग्रहण व्यवस्था, नगद-स्वर्ण-रजत का लेखा-जोखा एवं अन्य आरोपों के संबंध में जांच कर प्रतिवेदन सुझावों सहित प्रस्तुत करेगा।