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धार भोजशाला विवाद: हाई कोर्ट का महाफैसला आज, इंदौर-धार समेत मालवा क्षेत्र में 'हाई अलर्ट'

24 दिन की मैराथन सुनवाई के बाद दोपहर बाद आएगा कोर्ट का निर्णय
 
सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद; धार में धारा 163 लागू, 1200 से ज्यादा जवान तैनात
 

​इंदौर,15मई(इ खबर टुडे)। मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक व विवादित भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद मामले में आज 15 मई इंदौर हाई कोर्ट की डबल बेंच अपना बड़ा फैसला सुना सकती है। 24 दिनों तक चली लंबी और मैराथन सुनवाई के बाद कोर्ट ने पांच याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन (हस्तक्षेप याचिकाओं) पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज दोपहर बाद सुनाए जाने की संभावना है।

​इस संवेदनशील फैसले को देखते हुए पूरे मालवा अंचल, विशेषकर धार और इंदौर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा बलों को अलर्ट मोड पर डाल दिया है।

​धार पुलिस छावनी में तब्दील, धारा 163 लागू
​हाई कोर्ट के संभावित फैसले के मद्देनजर धार के कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने पूरे जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (पूर्व में धारा 144) के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिए हैं। यह आदेश 5 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। होटल और लॉज संचालकों को हर आने-जाने वाले का रिकॉर्ड रखने और संदिग्धों की सूचना तुरंत पुलिस को देने के निर्देश दिए गए हैं।

​सुरक्षा के लिहाज से धार शहर पूरी तरह पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका है। यहां एसटीएफ (STF) सहित 12,000 से अधिक पुलिस जवानों को तैनात किया गया है। स्थिति को संभालने के लिए धार के अलावा झाबुआ, बड़वानी और इंदौर से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है। सुरक्षा की कमान 2 एएसपी, 15 एसडीओपी, 5 डीएसपी और दो दर्जन से अधिक थाना प्रभारियों के हाथों में है। शहर की ऊंची इमारतों पर भी जवानों की तैनाती की गई है।

​इंदौर और रतलाम में भी कड़ी निगरानी
​फैसले के असर को देखते हुए इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा क्षेत्र में भी भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। वहीं पड़ोसी जिले रतलाम में भी दोपहर 2: 30 बजे आने वाले इस निर्णय को लेकर अलर्ट है। रतलाम एसपी अमित कुमार ने सभी थाना और चौकी प्रभारियों को मुस्तैद रहने और सूचना संकलन (इंटेलीजेंस) को मजबूत करने के सख्त निर्देश दिए हैं ताकि कानून-व्यवस्था हर हाल में बनी रहे।

​अदालत के फैसले का सब 
मिलकर सम्मान करें: उपमुख्यमंत्री

मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सभी पक्षों से शांति की अपील करते हुए कहा, "अदालत का जो भी फैसला आए, सब मिलकर उसका सम्मान करें। हम न्यायपालिका के निर्णय का स्वागत करेंगे। राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुख्ता इंतजाम हैं।"

​दोनों पक्षों और वकीलों की शांति की अपील
​सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर पोस्ट साझा कर फैसले की जानकारी दी। याचिकाकर्ता पक्ष और वकीलों (विष्णु शंकर जैन व विनय जोशी) ने एक वीडियो संदेश जारी कर सभी समुदायों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका पर सभी को पूरा भरोसा है, इसलिए जो भी फैसला आए, उसे सहर्ष स्वीकार किया जाए। साथ ही मध्य प्रदेश के डीजीपी और धार एसपी से कानून-व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रखने का आग्रह किया गया है।

​क्या है हिंदू पक्ष का दावा?
​अप्रैल माह में हुई सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष (याचिकाकर्ता आशीष गोयल, अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और विनय जोशी) ने कोर्ट में भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर और प्राचीन विद्या केंद्र बताते हुए कई साक्ष्य सौंपे। इनमें ​भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट। ​ब्रिटिशकालीन गजेटियर और ऐतिहासिक दस्तावेज। ​परिसर में मिले संस्कृत व प्राचीन नागरी लिपि के शिलालेख। ​मंदिर स्थापत्य के अवशेष, स्तंभ और देवी सरस्वती से जुड़े प्रतीक। हिंदू पक्ष का तर्क है कि परिसर की कई संरचनाएं इस्लामी स्थापत्य से बहुत पुरानी हैं, जो इसके मंदिर होने का प्रमाण हैं।

​2022 से दोबारा गरमाया मामला
​इस विवाद की वर्तमान कानूनी लड़ाई साल 2022 में शुरू हुई थी, जब रंजना अग्निहोत्री और उनके साथियों ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदुओं को पूर्ण पूजा का अधिकार देने की मांग की थी। इसके बाद साल 2024 में एएसआई ने 98 दिनों तक परिसर का वैज्ञानिक सर्वे किया था। इसी साल 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट ने परिसर में दिनभर निर्बाध पूजा-अर्चना की अनुमति भी दी थी।

​अब पूरे देश की नजरें इंदौर हाई कोर्ट के आने वाले इस ऐतिहासिक फैसले पर टिकी हुई हैं।