पुरानी नौकरी से बर्खास्तगी भविष्य के पुलिस करियर की राह नहीं रोक सकती: MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
इन्दौर,15 अक्टूबर(इ खबर टुडे)। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में नौकरी की आस लगाए बैठे युवाओं के लिए एक राहत भरा और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी को पहले सेवा से हटाया (Removal) गया है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह भविष्य में किसी नई सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य हो गया है।
मामले का विवरण:
याचिकाकर्ता चंद्रशिखर मौर्य को साल 2016 में 32वीं बटालियन एस.ए.एफ., उज्जैन में आरक्षक के पद पर नियुक्ति मिली थी। बीमारी और अन्य कारणों के चलते वे कुछ समय अनुपस्थित रहे, जिसके बाद 19 जून 2020 को उन्हें सेवा से हटाने (Removal) का दंडात्मक आदेश दिया गया। इसके बाद उन्होंने 2020-21 की नई पुलिस भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लिया और परीक्षा पास कर ली। लेकिन चरित्र सत्यापन के दौरान पुरानी बर्खास्तगी का हवाला देकर 26 जुलाई 2023 को उनका अभ्यर्थित्व खारिज कर दिया गया।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी:
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए एडवोकेट गगन बझाड़ और दीपक डोडिया ने कोर्ट का ध्यान मप्र पुलिस रेगुलेशन के नियम 214 (क्लॉज-5) की ओर आकर्षित किया। इसके तहत यह प्रावधान है कि सेवा से हटाया जाना भविष्य के रोजगार से अयोग्य नहीं ठहराता। हाईकोर्ट ने इस दलील को सही मानते हुए 26 जुलाई 2023 के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही, सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे पुलिस रेगुलेशन के नियमों को ध्यान में रखते हुए कांस्टेबल पद पर नियुक्ति के लिए नए सिरे से विचार करें।

