भारत विरोधी नैरेटिव गढ़ने के लिए हुआ एसएफआई यूके का कार्यक्रम, समर्थन में पहुंची ग्रेटा थनबर्ग
दिल्ली,01 अगस्त(इ खबर टुडे)। लंदन में एसएफआई यूके (SFI UK) द्वारा 26 जुलाई को आयोजित कार्यक्रम में स्वयंभू जलवायु कार्यकर्ता और किसान आंदोलन की “टूलकिट” विवाद से चर्चा में आई ग्रेटा थनबर्ग ने सीजेपी आंदोलन का समर्थन किया, आंदोलन को लोकतंत्र की लड़ाई बताया और वैश्विक एकजुटता की अपील की।
थनबर्ग ने कहा कि भारत में चल रहे छात्र आंदोलन ने दुनिया भर के लोगों को गर्व महसूस कराया है और यह संघर्ष केवल भारत का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का संघर्ष है। भारतीय छात्रों ने दिखाया है कि जब लोग एकजुट होकर विरोध करते हैं तो वे बड़े बदलाव ला सकते हैं। वे हमें लोगों की ताकत का असली अर्थ दिखाते हैं। भारतीय छात्रों का न्याय के लिए संघर्ष और लोकतंत्र तथा मुक्ति की व्यापक लड़ाई हमारी भी लड़ाई है। साथ ही अपने समर्थकों से भारत के समर्थन में एकजुट होने का आह्वान किया।
SFI UK ने कार्यक्रम को आंदोलन की “जीत का उत्सव” बताया। दावा किया कि आंदोलन के दबाव के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।
हालांकि, इस कार्यक्रम में किसी ने भी आंदोलन के दौरान हुई हिंसा का कोई उल्लेख नहीं किया। पत्थरबाजी, पुलिस और सुरक्षा बल के जवानों पर हमले, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और प्रदर्शनकारियों के नाम पर सक्रिय उपद्रवियों की गतिविधियों पर दोनों ने चुप्पी साधे रखी। आंदोलन के केवल एक पक्ष को सामने रखकर अंतरराष्ट्रीय मंच से भारत की छवि को धूमिल करने की कोशिश की गई।
यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ जब CJP ने 36 दिन तक चले अपने आंदोलन को समाप्त करने की घोषणा की। संगठन ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने उसकी मांगें स्वीकार कर ली हैं।
एसएफआई यूके (SFI UK) ने खुद को केवल इसी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा। इससे पहले भी लंदन, लीड्स और एडिनबर्ग में प्रदर्शनों के जरिए अपने समर्थकों को संगठित किया था। प्रदर्शन स्थलों और समय की पहले से घोषणा की, पोस्टर जारी किए और अपने नेटवर्क के माध्यम से प्रदर्शन का समन्वय किया। इसके बावजूद कुछ मीडिया संस्थानों ने भी प्रदर्शनों को भारतीय प्रवासी समुदाय की स्वतःस्फूर्त प्रतिक्रिया के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की।
ग्रेटा थनबर्ग का नाम पहली बार विवाद में वर्ष 2021 के किसान आंदोलन के दौरान सामने आया था। उस समय उन्होंने सोशल मीडिया पर एक “टूलकिट” साझा की थी, जिसमें आंदोलन के समर्थन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाने की रणनीति बताई गई थी। इस दस्तावेज़ को लेकर दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया था। हालांकि, एफआईआर में ग्रेटा थनबर्ग का नाम शामिल नहीं था।
भारत के आंतरिक मुद्दों पर विदेशी हस्तियों, विदेशी संगठनों और अंतरराष्ट्रीय छात्र समूहों की लगातार सक्रियता केवल समर्थन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह एक व्यापक राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने का प्रयास भी करती है। SFI UK का मंच, CJP का आंदोलन और ग्रेटा थनबर्ग का समर्थन इसी क्रम की कड़ी के रूप में देखा जा सकता है, जहां भारत विरोधी नैरेटिव स्थापित करने का प्रयास किया जाता है।

