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चिटफंड कंपनी खोलकर 40 लाख की ठगी करने वाले छह आरोपियों को 10-10 साल की जेल

उज्जैन की विशेष अदालत ने सुनाया फैसला; अधिक ब्याज और बीमा का लालच देकर बनाई थी शिकार

 

इंदौर, झाबुआ, धार और रतलाम के लोगों को झांसा देकर शहीद पार्क के पास खोला था ऑफिस

 

उज्जैन,30अगस्त(इ खबर टुडे)। चिटफंड कंपनी खोलकर आम जनता से करीब 40 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने वाले 6 अभियुक्तों को न्यायालय ने 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार शर्मा की अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया।

​मीडिया सेल प्रभारी एडीपीओ कुलदीप सिंह भदौरिया के अनुसार, वर्ष 2010 में आरोपियों ने उज्जैन के शहीद पार्क स्थित सिद्धिविनायक टावर में 'प्रज्ञा डेयरी एंड एग्रो लिमिटेड' नाम से चिटफंड कंपनी का दफ्तर खोला था। आरोपियों ने फरियादी मंगला, रेखा, कृष्णा, शिववती, गणेश पाल, सुनीता, साधना और राकेश सहित कई लोगों को जमा राशि पर अधिक ब्याज देने तथा एक किस्त जमा होने के बाद सदस्य की मृत्यु पर पूर्ण बीमा राशि देने का झांसा दिया।

​जमा पैसों से खरीदी जमीन और खोला स्कूल
आरोपियों के झांसे में आकर लोगों ने करीब 40 लाख रुपए कंपनी में जमा करा दिए, जिसकी रसीद और सर्टिफिकेट भी दिए गए। जनता के पैसों से आरोपियों ने पानबिहार और खलघाट में जमीन खरीदी तथा इंदौर में एक स्कूल भी खोल लिया। इसके बाद आरोपी ऑफिस बंद कर फरार हो गए। धोखाधड़ी का शिकार हुए पीड़ितों की शिकायत पर 11 सितंबर 2016 को माधवनगर थाने में मामला दर्ज किया गया।

​सजा पाने वाले अभियुक्त
​पूनमचंद पाटीदार (61): निवासी बॉम्बे हॉस्पिटल के पास इंदौर (हाल मुकाम बनी, पेटलावद, झाबुआ)
​नानालाल पाटीदार (58): निवासी ग्राम बनी, पेटलावद (झाबुआ)
​मीरा नायक (50): निवासी ग्राम रब्बापुर (झाबुआ)
​प्रदीप पाटीदार (38): निवासी खंडवा, थाना कुक्षी (धार)
​मोहनलाल पाटीदार (48): निवासी संतनगर (रतलाम)
​रमेशचंद्र पाटीदार (54): निवासी तिरुपति नगर (रतलाम)
​(मामले में एक आरोपी चंचल सोनी अभी फरार है।)

​अभियोजन पक्ष की सशक्त पैरवी
प्रकरण की विवेचना निरीक्षक अनिल शुक्ला द्वारा की गई तथा न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेंद्र सिंह चौहान एवं अजय कुमार पांडेय ने पैरवी की। न्यायालय ने आरोपियों को धोखाधड़ी और हेराफेरी की धाराओं में 5 वर्ष तथा बैंककर्मी/एजेंट के रूप में जमाराशि में हेरफेर करने के आरोप में 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।