{"vars":{"id": "115716:4925"}}

  "बोमा" की तैयारी फिर शुरू,अधिकतम नीलगाय पकडी जाएंगी

 शाजापुर से 2 हजार काला हिरण पकड़ने का लक्ष्य
 
 *** एक्सपर्टस के साथ उज्जैन में भी चलेगा अभियान
*** हेलीकाप्टर का उपयोग होगा

 

उज्जैन,22 सितम्बर(इ खबर टुडे)। दक्षिण अफ्रीका की बोमा पद्धति से शाजापुर जिले में पिछले वर्ष में 846 कृष्‍णमृग एवं 67 नीलगाय को पकड कर उनका सफल स्‍थानांतरण किया गया था। इसकी अपेक्षा उज्जैन में इस वर्ष इस पद्धति का उपयोग मेन्यूअल किया गया और असफलता हाथ लगी थी मात्र 4 नीलगाय पकडी जा सकी थी। वन विभाग एक बार फिर से खेतों के लिए नुकसानदेह साबित हो रहे इन वन्यजीवों को पकडने के लिए बोमा पद्धति का उपयोग करने जा रहा है। इसमें शाजापुर से 2 हजार कृष्णमृग और अधिकतम नीलगाय पकडने का लक्ष्य रखा गया है।

उज्जैन संभाग मुख्य वन संरक्षक डा.किरण बिसेन बताती हैं कि 9 से 31 अक्टूबर तक शाजापुर जिले में इस अभियान को चलाया जाएगा। इसमें बोमा पद्धति के एक्सपर्ट थी साथ रहेगे। शाजापुर सहित शुजालपुर एवं कालापीपल क्षेत्र में भी इस पर काम करते हुए 2 हजार कृष्णमृग एवं अधिकतम नीलगाय पकडने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही उज्जैन में भी बोमा पद्धति का उपयोग करते हुए नीलगाय को पकडे जाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि उज्जैन में पिछली बार मेन्यूअल प्रयास किए गए थे इसकी वजह से पर्याप्त मात्रा में नीलगाय नहीं पकडी जा सकी। इस बार अभियान में एक्सपर्ट साथ रहेंगे एवं हेलीकाप्टर एवं पायलट भी रहेंगे।

देश में पहली बार शाजापुर में पकडे थे 846 कृष्‍णमृग

प्रदेश ही नहीं देश में शाजापुर में बोम्मा पद्धति से काले हिरण / नीलगाय पकड़ने का अभियान 15 अक्टूबर 2025 से चलाया गया था। दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों की उपस्थिति में इसमें हेलीकाप्टर का उपयोग करते हुए कालापीपल क्षेत्र से शुरूआत की गई थी। इसमें पहली बड़ी सफलता दीपावली की सुबह, 20 अक्टूबर 2025 (सोमवार) को मिली, जब कालापीपल के इमलीखेड़ा गांव में हेलीकॉप्टर से हांका लगाकर 45 काले हिरण पकड़े गए और उसी दिन 34 अन्य काला हिरण पकडे गए। साउथ अफ्रीका की 15 सदस्यीय 'कंजर्वेशन सॉल्यूशंस' टीम ने हेलीकॉप्टर की मदद से V-आकार के बोमा (फनल जाल) में हिरणों को घेरा। 846 कृष्‍णमृग एवं 67 नीलगाय को पकड कर उनका सफल स्‍थानांतरण गांधी सागर अभयारण्य, मंदसौर में किया गया , जो देश में चीतों का दूसरा घर है।

उज्जैन में असफलता हाथ लगी थी

उज्जैन जिले में इसके उज्जैन वनमंडल अंतर्गत बृजराजखेड़ी, नरवर, चंदेसरा, हरसोदन क्षेत्र में नीलगाय को पकडने के लिए 1से 14 जून 26 तक प्रयास किए गए थे। लक्ष्य 100 नीलगाय पकड़कर गांधी सागर अभयारण्य भेजना रखा गया था। इसके लिए 1.5 हेक्टेयर में कीप के आकार का विशाल बाड़ा (बोमा) बनाया गया। अभियान फेल रहा । 12 जून को मुख्य हांका हुआ। विभाग एक भी नीलगाय बोमा से नहीं पकड़ पाया। जिन 4 नीलगायों को गांधी सागर भेजना बताया गया उन्हें ग्रामीणों ने खुले खेत में दौड़ा-दौड़ाकर पकड़ा था।