रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया पटवारी दोषसिद्ध; न्यायालय ने सुनाई 4 वर्ष की सजा
उज्जैन, 28 फरवरी (इ खबर टुडे)। भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त रुख अपनाते हुए विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त की प्रभावी कार्रवाई में दोषी पाए गए पटवारी को न्यायालय ने कठोर दंड दिया है। उज्जैन स्थित विशेष न्यायालय ने आरोपी नितिन खत्री, तत्कालीन पटवारी ग्राम मोहनपुरा, तहसील एवं जिला उज्जैन को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत चार वर्ष के सश्रम कारावास और 24 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। न्यायालय के आदेश पर दोषी को भैरूगढ़ जेल भेज दिया गया।
विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) द्वारा 27 फरवरी 2026 को पारित निर्णय में यह दंड सुनाया गया। यह प्रकरण लोकायुक्त पुलिस के अपराध क्रमांक 147/2022 से संबंधित है।
शिकायत से सजा तक का सफर
मामले की शुरुआत 11 जून 2022 को हुई, जब उज्जैन निवासी रविन्द्र देशपाण्डे ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी के नाम से ग्राम मोहनपुरा में खरीदी गई कृषि भूमि के नामांतरण एवं सीमांकन कार्य के लिए संबंधित हल्का पटवारी नितिन खत्री द्वारा 15 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की गई थी।
शिकायत की तस्दीक के बाद निरीक्षक राजेन्द्र वर्मा ने आवेदक को शासकीय डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर उपलब्ध कराया। रिकॉर्ड की गई बातचीत में आरोपी 12 हजार रुपये रिश्वत लेने पर सहमत हुआ। प्रमाण मिलने के बाद 20 जुलाई 2022 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।
21 जुलाई 2022 को लोकायुक्त टीम ने सुनियोजित ट्रैप कार्रवाई करते हुए आरोपी को उसके निजी कार्यालय (महाकाल वाणिज्य क्षेत्र, नानाखेड़ा थाना के सामने, उज्जैन) में 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
अभियोजन और निर्णय
विवेचना पूर्ण होने पर उप पुलिस अधीक्षक राजेश पाठक द्वारा 5 सितंबर 2023 को विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनोज कुमार पाठक ने प्रभावी पैरवी की। साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए चार वर्ष सश्रम कारावास एवं 24 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
इस निर्णय को भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक सशक्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि रिश्वतखोरी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।