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जबलपुर लैब रिपोर्ट में खुलासा, हाथी पॉजिटिव  

हथनी 'श्यामू' को EEHV-1 घातक वायरस  
 
विशेषज्ञों की सलाह पर अब एंटीवायरल इलाज शुरू

 

उज्जैन, 12 अगस्त (इ खबर टुडे / ब्रजेश परमार)। पिछले 9 सालों से भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी की शान रही मादा हथनी 'श्यामू' को जानलेवा वायरस ने जकड़ लिया है। जबलपुर की नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय की रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि मादा श्यामू EEHV-1 यानी एंडोथीलियोट्रॉपिक हर्पीज वायरस टाइप-1 से संक्रमित हैं।

कुछ दिनों पूर्व सतपूडा टाईगर रिजर्व के वन्यजीव पशु चिकित्सक डा. गुप्ता उज्जैन आए थे। उन्होंने अपनी देखरेख में श्यामू के सैंपल लेकर उन्हें जबलपुर विश्व विद्यालय को भेजकर उसकी रिपोर्ट का आग्रह किया था। मादा श्यामू के विजानल, मूंह, आंखों का स्वाब सैंपल में लिया गया था। इन तीनों ही स्वाब की रिपोर्ट पाजीटिव सामने आई है।

ये है ईईएचवी-1
हाथियों में पाया जाने वाला एक घातक वायरस है। खासकर 1 से 8 साल के बच्चों के लिए ये जानलेवा साबित होता है। बड़े हाथी इसके कैरियर बन जाते हैं और स्ट्रेस, भीड़ या थकान में वायरस एक्टिव हो जाता है।  रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन भी करना पड़ सकता है।

विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. काजल के. जाधव ने वन विभाग उज्जैन को भेजी रिपोर्ट में निर्देश देते हुए कहा है कि मादा श्यामू के तुरंत इलाज के तहत इम्यूनो बूस्टर और एंटीवायरल दवा Famciclovir, Acyclovir शुरू करें। इसके साथ ही कहा गया है कि किसी भी हाथी के बछड़े को इनके संपर्क में न आने दें। ब्लड ट्रांसफ्यूजन के लिए डोनर हाथी का पहले से इंतजाम और टेस्ट कर लें।आपात स्थिति के लिए एंटीबायोटिक, पेनकिलर और स्टेरॉयड पहले से रखे जाएं।

मादा श्यामू की जगह सूमा ने ली
पिछले 9 साल से सवारी में शामिल रही 32 साल की श्यामू के पैर में दिक्कत के साथ-साथ अब वायरस की पुष्टि के बाद वन विभाग ने उसे आराम देने का फैसला पिछले दिनों ही लिया था। उसकी जगह 67 साल की सूमा का वाक टेस्ट कर उसे फिट घोषित किया गया है। सोमवार को उसका क्लीनिकली टेस्ट किया जिसमें महावत के कहने पर उसने पशु चिकित्सक अरविंद मैथनिया एवं सतीश शर्मा को नमस्कार किया और सीधा पांव उठाने के आदेश का हुबहु पालन किया । डा.मैथनिया बताते हैं कि सूमा पूरी तरह से सजग और सतर्क थी उसके साथ ही आदेशों को बडी गंभीरता से मान रही थी। उसके टेस्ट के दौरान पटाखें चलाकर भी वन विभाग ने देखा था जिसमें उसमें कोई चमक वाली स्थिति नहीं रही थी।