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 खेत पर काम कर रहे वृद्ध कृषक पर हमला किया था, बचाने आए पुत्र को भी हमला कर घायल किया

 ग्रामीण पर हमला कर हत्या कर चुके हिंसक सांडों को बेहोश कर पकडा गया
 
 तहसील प्रशासन, पशु चिकित्सा एवं वन विभाग के समन्वय से रेस्क्यू आपरेशन चलाया गया
 

उज्जैन, 21जनवरी (इ खबर टुडे / ब्रजेश परमार)। घट्टिया तहसील के ग्राम झीतरखेडी से मंगलवार को दो सांडों को वन विभाग की मदद से पशु चिकित्सकों ने ट्रेंक्यूलाईज गन से बेहोश कर पकडा है। सांडों के हमले से गांव के निवासी कृष्णकांत पिता रघुनाथ 67 वर्ष की मौत हो गई थी एवं पिता को बचाने आया पुत्र संजय 46 वर्ष गंभीर रूप से घायल हुआ था। इसके साथ ही तीन –चार अन्य ग्रामीणों पर भी हमला किया था जिसमें उन्हें चोंट आई थी। इसके बाद दोनों सांडों को प्रशासनिक आदेश पर रेस्‍क्यू आपरेशन कर पकडा गया।

एसडीएम राजाराज करजरे के अनुसार तहसील मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर ग्राम झीतरखेडी में ये सांड जन्म से ही रह रहे थे। पिछले 5-6 दिनों में आकस्मिक ये हिंसक हो उठे एवं ग्रामीणों पर हमला करने लगे थे। शनिवार को इनके हमले से खेत पर काम कर रहे कृषक कृष्णकांत गंभीर रूप से घायल हुआ था बाद में उसकी मौत हो गई थी। हमले से बचाने आए उसके पुत्र संजय को भी सांडों ने गंभीर घायल कर दिया था। इसे लेकर वन विभाग एवं पशु चिकित्सा विभाग को तत्काल सांडों को पकडने के लिए कहा गया था। दोनों सांडों को बेहोश कर पकडा गया। दोनों को अलग-अलग गौशाला में भेजा गया है।

वन विभाग से ली मदद
घट्टिया तहसील क्षेत्र में गैर वन्यजीव के रेस्क्यू आपरेशन के लिए प्रशासन को वन विभाग की मदद लेना पडी है। इसके लिए एसडीएम राजाराम करजरे ने वन मंडलाधिकारी को पत्र लिखकर आवारा सांड को बेहोश करने के लिए डाट गन की मांग करनी पडी। वन विभाग ने तत्काल ही गन के साथ अपना वन्य जीव रेस्क्यू दल भी स्थल के लिए भेजा और पूरे आपरेशन में अपनी मदद दी है।

मृतक को 4 लाख की मदद
एसडीएम श्री करजरे ने बताया कि मृतक कृषक के परिजनों को कृषक कल्याण योजना से 4 लाख की सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। आवारा सांडों ने उन पर खेत में काम के दौरान हमला किया था। मृतक का पुत्र उसे बचाने आया था उस पर भी सांडों ने हमला कर दिया था जिसमें वह भी गंभीर घायल हुआ है जिसका ईलाज अस्पताल में चल रहा है। उसकी भी सहायता की जा रही है।

वन अमला पहुंचा मय दल बल
डिप्टी रेंजन वन्य जीव मदन मौरे ने बताया कि वन मंडलाधिकारी के आदेश पर तत्काल ही रेस्क्यू टीम आपरेशन में इसमें शामिल होने पहुंची थी। विभाग की ट्रेंक्यूलाईज गन पशु चिकित्सकों को उपलब्ध करवाई गई थी। दल में शामिल आधा दर्जन कर्मचारी मय वाहन एवं संसाधनों के आपरेशन में पहुंचे थे। आवारा सांडों को वन विभाग की ट्रेंक्यूलाईज गन से बेहोश किया गया। इसके बाद उन्हें पकडा गया।

झायलाजीन एवं किटामीन का डोज दागा
पशु चिकित्सक डा. अरविंद मैथनिया के अनुसार विभागीय आदेश पर वे घट्टिया में पदस्थ पशु चिकित्सक आर आर शाक्य के सहयोग के साथ रेस्क्यू आपरेशन को डेढ घंटे में अंजाम दिया गया। काले रंग के दोनों सांडों को सफल रूप से डीन इंजेक्ट गन से झायलाजीन एवं किटामीन का डोज दूर से ही दाग कर बेहोश कर दिया गया। हिंसक हो चुके दोनों आवारा सांड काले रंग के और मालवी नस्ल के थे। इनमें से एक की उम्र 4 एवं दुसरे की 6 वर्ष थी। बेहोश कर दोनों सांडों को जेसीबी के माध्यम से वाहन में रखा गया। इसके बाद प्रशासनिक आदेश पर इनमें से 4 वर्षीय  सांड को पानबिहार की कृष्ण गौशाला एवं 6 वर्ष वाले को माधव गौशाला घट्टिया में छोडा गया है।