उज्जैन के सीनियर एडव्होकेट ने बगैर सुप्रीम कोर्ट जाए जज के सामने क्लाइंट का पक्ष रख दिया
उज्जैन,23 मई(इ खबर टुडे)। डिजिटल क्रांति से पर्यावरण संरक्षण: प्रधान मंत्री और सुप्रीम कोर्ट की पहल का असर देखिए- उज्जैन के सीनियर एडवोकेट वीरेंद्र शर्मा ने घर बैठे सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की है। श्री शर्मा ने अपने निवास से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में पुलिस थाना नानाखेड़ा के एक महत्वपूर्ण मामले में पैरवी की।
देश के माननीय प्रधानमंत्री और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) द्वारा 'पेट्रोल बचाने और पर्यावरण संरक्षण' को लेकर की गई विशेष पहल का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। इसी कड़ी में न्याय जगत से जुड़ा एक बेहद सराहनीय और अनुकरणीय उदाहरण सामने आया है। इस महत्वपूर्ण प्रकरण की सुनवाई के दौरान तकनीक का बेहतरीन समन्वय देखने को मिला। जब उज्जैन से सीनियर एडवोकेट वीरेंद्र शर्मा अपने निवास से वर्चुअली सुप्रीम कोर्ट से जुड़े, तो उसी समय देश के जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े हुए थे। कानूनविदों ने बिना किसी यात्रा के, अपने-अपने स्थानों से अदालत के समक्ष प्रभावी रूप से पक्ष रखा और मामले पर विस्तृत बहस हुई।हाल ही में माननीय प्रधानमंत्री और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने देश के अधिवक्ताओं और न्याय प्रणाली से जुड़े लोगों से अपील की थी कि वे छोटे-मोटे मामलों या नियमित सुनवाइयों के लिए लंबी यात्राएं करने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) का अधिक से अधिक उपयोग करें। वकीलों और पक्षकारों को दिल्ली आने-जाने के लिए हवाई या ट्रेन यात्रा नहीं करनी पड़ती, जिससे देश के संसाधनों की बचत होती है। कोर्ट की कार्यवाही में गति आती है और अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलती है। यात्राएं कम होने से कार्बन फुटप्रिंट घटता है, जो सीधे तौर पर पर्यावरण को बेहतर बनाने में मददगार है। उज्जैन के सीनियर एडवोकेट वीरेंद्र शर्मा द्वारा उठाया गया यह कदम अन्य वकीलों के लिए भी प्रेरणादायी है। न्याय जगत और स्थानीय प्रबुद्ध जनों ने इस ऐतिहासिक पैरवी की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल माध्यमों का ऐसा उपयोग न सिर्फ वकीलों का समय और पैसा बचाता है, बल्कि देश के पर्यावरण के हित में भी एक बड़ी क्रांति है। अधिवक्ताओं की इस सजगता ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो तकनीक के सहारे घर बैठे भी देश की सबसे बड़ी अदालत में प्रभावी न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है।