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 विद्यार्थी अपने जीवन में ज्ञान, अनुशासन का पालन करें-राज्यपाल श्री पटेल

 महर्षि पाणिनि संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय का छठा दीक्षांत समारोह
 
 दो डी लिट,21 पीएचडी सहित 1303 उपाधियां प्रदान की गई

 

उज्जैन,30 जून (इ खबर टुडे) । महर्षि पाणिनि संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय का छठा दीक्षांत समारोह कालिदास संस्कृत अकादमी के पंडित सूर्य नारायण व्यास संकुल सभागृह में मंगलवार को राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। राज्यपाल श्री पटेल ने समारोह को संबोधित करते हुए उपाधि प्राप्त सभी विद्यार्थियों को शुभकामना देते हुए कहा कि उपाधि प्राप्त करने के बाद विद्यार्थी अपने जीवन में ज्ञान, अनुशासन का पालन करें।

उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अपनी जड़ों की ओर लौटने का अवसर दिया है। हमारी इसी संस्कृति को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से उच्च शिक्षा तक लाने का अवसर है। विश्वविद्यालयों से अपेक्षा है कि संस्कृत की पहचान विश्व में बनाएं। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि हमारा देश प्राचीन काल से ही विद्या के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। पहले भारत में लोग पढऩे आते थे, अब हमारे बच्चे पढ़ाई के लिए विदेश की ओर जा रहे है। विकसित भारत में 2047 में किसी को भी विदेश जाने की आवश्यकता नही होगी। उन्होने कहा कि हम संस्कृति और संस्कार की बात करते है, लेकिन रामायण, भागवत गीता के बारे में हमने कभी हमारे बच्चों को नही बताया, बच्चों के हाथों में खिलौने देते है। लेकिन अब बच्चों को संस्कार के साथ बताना जरूरी है कि हम प्रकृति के पुजारी है, सूर्य को अर्ध्य देते है। 

समारोह के सारस्वत अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलपति के श्रीनिवास वरखेड़ी और सम्मानित अतिथि श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलगुरू प्रो. रमेश कुमार पांडे थे। समारोह के प्रारंभ में परिसर में समूह चित्र के पश्चात अकादमिक शोभायात्रा निकाली गई। कार्यक्रम के प्रारंभ में राष्ट्रगान तत्पश्चात विश्वविद्यालय का कुलगान हुआ। 

 कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि आज जिन विद्यार्थियों को उपाधि प्राप्त की है, वे सभी हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें तथा भारतीय संस्कृति और मान्यताओं को पूरे विश्व के पटल पर लेकर आने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। कार्यक्रम में दीक्षांत भाषण सारस्वत अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलपति के श्री निवासवरखेड़ी ने दिया। कार्यक्रम को स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज ने भी संबोधित किया। समारोह का संचालन डॉ. उपेंद्र भार्गव ने किया और आभार कुलसचिव डॉ. दिलीप सोनी ने माना।

दो डी लिट,21 पीएचडी सहित 1303 उपाधियां

इस अवसर पर राज्यपाल श्री पटेल सहित उपस्थित अतिथियों द्वारा विश्वविद्यालय से प्रकाशित विभिन्न पुस्तकों का विमोचन भी किया। समारोह में महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठानम् पुर्ण के संस्थापक स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज को संस्कृत भाषा तथा साहित्य, धर्म, संस्कृत, राष्ट्रधर्म आदि के व्यापक प्रचार प्रसार के क्षेत्र में किए जा रहे योगदान को रेखांकित करते हुए महर्षि पाणिनि संस्कृत एंव वैदिक विश्वविद्यालय द्वारा महामहोपाध्याय (डी.लिट.) की मानद उपाधि से विभूषित किया गया। इसी प्रकार प्रकार श्री लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलपति प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय को संस्कृत भाषा तथा साहित्य के क्षेत्र में किए गए अप्रतिम योगदान के लिए महर्षि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा विद्यावाचस्पति (डी.लिट.)की मानद उपाधि प्रदान की गई। 

समारोह में पीएचडी की 21 उपाधियों के साथ ही कुल 1303 उपाधियां प्रदान की गई। वहीं कुल 42 मेडल विद्यार्थियों को प्रदान किए गए जिसमें 16 स्वर्ण पदक, 13 रजत पदक तथा 13 विद्यार्थियों को कांस्य पदक के साथ उपाधियां प्रदान की गई।