अब हरियाणा में शिक्षकों से नहीं कराया जाएगा गैर शैक्षणिक कार्य
राज्य में अब शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य नहीं कराया जाएगा। शिक्षा निदेशालय का मानना है कि इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कुछ अध्यापक तो कई वर्षों से निर्वाचन कार्यालयों में कार्यरत हैं। कुछ को उपमंडल स्तर पर लगातार गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाया गया है। आरटीई में कुछ कार्य ही कराने की छूट दी गई है। शिक्षक को साल में 220 शैक्षणिक दिवस स्कूल में उपस्थित रहना अनिवार्य है। शिक्षकों की विद्यालयों से अनुपस्थिति विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया प्रभावित करती है, जो राष्ट्रीय क्षति है। पत्र में डीईओ, डीईईओ, जिला परियोजना समन्वयक और बीडीओ को निर्देश दिए गए हैं कि शिक्षा विभाग के साथ दूसरे विभागों के कार्यालय में तैनात शिक्षकों को तुरंत रिलीव कराकर विद्यालयों में ज्वाइन कराया जाए।
शिक्षकों से मिट्टी की जांच तक कराई जा रही
आरटीई एक्ट में शिक्षकों से जनगणना, चुनाव और आपदा राहत में काम करने की छूट है लेकिन इन्हें दूसरे कार्यों में लगाया हुआ है। सीएमओ में एक शिक्षक ओएसडी के पद पर है वहीं चार-पांच शिक्षक मंत्री के स्टाफ में भी हैं। उन्हें परिवार पहचान-पत्र के काम में भी लगाया गया। खेतों की मिट्टी की जांच तक के काम भी शिक्षकों से कराए जाते हैं। गीता जयंती के कार्यक्रमों में टेंट, कुर्सी के इंतजाम तक शिक्षकों से कराए जा रहे हैं। स्कूलों में बच्चों को टेबलेट बांटने का काम भी शिक्षकों को दे दिया जाता है। सूत्रों का कहना है कि बीएलओ समेत दूसरी जगह ड्यूटी देने वाले शिक्षकों का आंकड़ा 15 हजार तक है।