नागदा के पास छोटे से गांव मखला का बेटा बना मिसाल, NEET में 531 अंक लाकर गांव का पहला MBBS डॉक्टर बनेगा
रतलाम,31 जुलाई (इ खबर टुडे)। कहते हैं कि सफलता बड़े शहरों की मोहताज नहीं होती, बल्कि सही मार्गदर्शन, कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास से हासिल होती है। इसे सच कर दिखाया है नागदा शहर के समीप पालकी से आगे स्थित छोटे से गांव मखला के निवासी जयवर्धन सिंह राठौड़, पिता श्री जीवन सिंह राठौड़ ने। लगभग 400–500 की आबादी वाले मखला गांव के जयवर्धन ने री - नीट 2026 में 531 अंक प्राप्त कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वे अपने गांव के पहले विद्यार्थी हैं जो MBBS डॉक्टर बनने जा रहे हैं।
जयवर्धन ने 12वीं के बाद बेहतर तैयारी के उद्देश्य से इंदौर के एक प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान में प्रवेश लिया था, लेकिन अपेक्षित मार्गदर्शन नहीं मिलने के कारण उन्हें नीट -25 में बहुत कम अंक आये एवं सफलता नहीं मिल सकी। इससे उनका आत्मविश्वास भी कमजोर पड़ गया। परिवार ने इसके बाद बड़े शहरों की बजाय अपने क्षेत्र के आसपास ऐसे संस्थान की तलाश शुरू की, जहां परिणाम के साथ सही मार्गदर्शन भी मिले।
इसी दौरान जयवर्धन ने रतलाम की कई कोचिंग संस्थाओं का भ्रमण किया और डेमो क्लास लेने के बाद अभ्यास कॅरियर इंस्टीट्यूट, रतलाम में प्रवेश लिया। यहां उन्होंने पूरे एक वर्ष अनुशासित वातावरण में मेहनत की और शिक्षकों के मार्गदर्शन में अपनी तैयारी को नई दिशा दी।
3 मई को आयोजित पहली NEET परीक्षा में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन परीक्षा निरस्त होने की घटना ने उन्हें मानसिक रूप से झकझोर दिया। उन्हें लगा कि उनका सपना अधूरा रह जाएगा। इसी कठिन समय में अभ्यास कॅरियर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. राकेश कुमावत ने उनका मनोबल बढ़ाया, उन्हें निराश न होने की सलाह दी और पूरे आत्मविश्वास के साथ री-नीट की तैयारी में जुटने के लिए प्रेरित किया।
21 जून को आयोजित नीट परीक्षा के बाद जयवर्धन ने पूरे विश्वास के साथ कहा कि उनका पेपर बहुत अच्छा हुआ है। परिणाम घोषित होने पर 531 अंक प्राप्त कर उन्होंने साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत के दम पर कोई भी सपना साकार किया जा सकता है।
परिणाम आने के बाद पूरे परिवार और गांव में खुशी का माहौल है। जयवर्धन के बड़े पिताजी ने बताया कि जयवर्धन सिंह राठौड़ मखला गांव के पहले विद्यार्थी हैं जो MBBS डॉक्टर बनने जा रहे हैं। यह उपलब्धि केवल उनके परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए गर्व का विषय है।
इस अवसर पर अभ्यास कॅरियर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. राकेश कुमावत ने कहा, "विद्यार्थी की मंजिल उसके शहर से नहीं, बल्कि उसकी मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन से तय होती है। जयवर्धन ने यह साबित कर दिया कि छोटे गांवों के बच्चे भी बड़े सपनों को साकार कर सकते हैं।"
मखला गांव के इस होनहार बेटे की सफलता आज उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो किसी असफलता के बाद अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं। सही मार्गदर्शन, दृढ़ संकल्प और लगातार मेहनत से हर सपना पूरा किया जा सकता है।