रतलाम जिला जेल की दीवारें बनीं कैनवास, चित्रकारी से बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव की पहल
रतलाम,11 सितंबर(इ खबर टुडे)। "दीवारें बोलती हैं" — यह कहावत अब रतलाम सर्किल जेल में सच होती दिखाई दे रही है। जेल की सुस्त और सफेद दीवारें अब सतरंगी रंगों और आकर्षक चित्रकारी से खिलखिला उठी हैं। बंदियों की निराशा दूर करने और उनके जीवन में नया उत्साह भरने के उद्देश्य से रतलाम जेल की दीवारों पर अद्भुत पेंटिंग्स उकेरी गई हैं।
जेल की दीवारों पर भगवान श्री गणेश, बुद्ध देव, राष्ट्रीय पक्षी मोर, और पारंपरिक श्रृंगार करती महिलाओं के चित्र बनाए गए हैं। दीवारों पर उकेरी गई यह कलाकृतियां बंदियों के मन को शांति देने और उन्हें मानसिक तनाव से मुक्त करने में मददगार साबित हो रही हैं।
दिल्ली की टीम ने 15 दिनों में बदला नजारा
दिल्ली की 'सौभाग्य फाउंडेशन केयर' टीम द्वारा पिछले 15 दिनों से लगातार इस प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा था। डॉ. पूनम सिंह, मोहित मनोचा और उनकी समर्पित आर्टिस्ट टीम ने अपनी कला के जरिए जेल के माहौल को पूरी तरह बदल दिया है।
विशेष पहल
दिल्ली की रोहिणी (तिहाड़) जेल के बाद मध्य प्रदेश की रतलाम सर्किल जेल संभवतः पहली ऐसी जेल बनी है, जहाँ बंदियों के मानसिक पुनर्वास और जीवन सुधार के लिए इस स्तर पर आर्ट थेरेपी का सहारा लिया गया है। रंगों के माध्यम से बंदियों के मन में सकारात्मक सोच जगाना, उनके भीतर छिपी निराशा को दूर करना और उन्हें अपराध के रास्ते से दूर कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना।
बदलाव की ओर कदम
जेल प्रशासन और आर्टिस्ट टीम का मानना है कि रंगों और कला का मानव जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। दीवारों पर बने भगवान बुद्ध और श्री गणेश के चित्र बंदियों को आत्मचिंतन और शांति की ओर प्रेरित करेंगे, वहीं मोर और अन्य प्राकृतिक पेंटिंग्स जेल परिसर में एक जीवंत माहौल बनाए रखेंगी।