रतलाम जिले के 1,780 सरकारी देवस्थानों की 4,622 हेक्टेयर भूमि का होगा सत्यापन
रतलाम, 07 अक्टूम्बर (इ खबर टुडे)। जिले में शासन प्रबंधित देवस्थानों की बेशकीमती जमीनों के संरक्षण और राजस्व रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा अभियान शुरू किया है। कलेक्टर अजय कटेसरिया ने जिले के सभी 1,780 सरकारी देवस्थानों के अधीन आने वाली 4,622.02 हेक्टेयर कृषि व अन्य भूमि का खसरा, बी-1, नक्शा और देवस्थान पंजी से शत-प्रतिशत मिलान करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
इस आदेश के तहत सभी एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को मैदानी स्तर पर कार्रवाई कर राजस्व अभिलेखों में आवश्यक सुधार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
देवता ही होंगे भूमिस्वामी, पुजारी का नाम केवल टिप्पणी में
कलेक्टर ने अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय (स्टेट ऑफ एमपी बनाम पुजारी उत्थान एवं कल्याण समिति, 2021) का विशेष रूप से उल्लेख किया है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशानुसार मंदिर या देवस्थान की संपत्ति के कानूनी भूमिस्वामी स्वयं अधिष्ठाता देवता (विधिक व्यक्तित्व) हैं। केवल पूजा-अर्चना करने से किसी पुजारी या व्यवस्थापक को भूमि पर व्यक्तिगत स्वामित्व या बेचने/बंधक रखने का अधिकार नहीं मिलता। अभिलेखों में "मध्यप्रदेश शासन द्वारा, कलेक्टर जिला रतलाम, प्रबंधक" के रूप में अद्यतन प्रविष्टि की जाएगी। वास्तविक रूप से सेवा देने वाले पुजारी का नाम सिर्फ टिप्पणी कॉलम में "पुजारी" के रूप में ही दर्ज रहेगा।
तहसीलवार देवस्थान और भूमि का ब्योरा
तहसील/क्षेत्रदेवस्थानों की संख्याकुल रकबा (हेक्टेयर में)
रतलाम 6231,730.50
पिप्लोदा 319913.65
जावरा 316791.01
आलोट 291662.52
ताल 154304.09
सैलाना 64195.95
रावटी 1121.94
बाजना 0202.36
कुल (जिले में)1,7804,622.02 है।
इसके अतिरिक्त जिले के बाहर स्थित 41 देवस्थानों की 212.62 हेक्टेयर भूमि भी रतलाम जिले के विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है, जिसका भी सत्यापन किया जाएगा।
अतिक्रमण और अवैध नामांतरण पर तुरंत होगी कार्रवाई
कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान यदि किसी देवस्थान की भूमि के अनधिकृत विक्रय, अवैध नामांतरण या राजस्व रिकॉर्ड में किसी प्रकार की गंभीर त्रुटि पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी इसकी सूचना तत्काल एसडीएम और कलेक्टर कार्यालय को भेजेंगे।
प्रत्येक देवस्थान की पृथक फाइल तैयार कर पूरी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी, ताकि देवस्थानों की संपत्ति को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके।