रतलाम नगर निगम में सावरकर पर टिप्पणी को लेकर बवाल: सदन स्थगित, बाहर महापौर ने फूंका पुतला (देखिए वीडियो)
रतलाम, 07 अप्रैल(इ खबर टुडे)। नगर निगम के बजट सम्मेलन में मंगलवार को उस समय भारी हंगामा और राजनीतिक गतिरोध देखने को मिला, जब स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर पर की गई एक टिप्पणी ने विवाद का रूप ले लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जहाँ सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी, वहीं नगर निगम के बाहर भाजपा ने कड़ा विरोध प्रदर्शन करते हुए पुतला दहन किया।
बजट प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस पार्षद सलीम बागवान के एक बयान ने सदन में आग लगा दी। अपने भाषण के दौरान बागवान ने वीर सावरकर को 'देशद्रोही' कह दिया। इस टिप्पणी के आते ही सत्ता पक्ष (भाजपा) के पार्षद भड़क उठे और सदन के बीचों-बीच आकर विरोध शुरू कर दिया।
दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और नारेबाजी के कारण माहौल इतना गरमा गया कि सभापति और महापौर की शांति की अपीलें बेअसर रहीं। अंततः, सदन में व्यवस्था न बनते देख कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
महापौर के नेतृत्व में सड़क पर उतरी भाजपा
सदन की कार्यवाही स्थगित होने के तुरंत बाद, महापौर प्रहलाद पटेल के नेतृत्व में भाजपा पार्षदों और कार्यकर्ताओं ने नगर निगम के बाहर मोर्चा खोल दिया। आक्रोशित भाजपाइयों ने कांग्रेस पार्षद सलीम बागवान और कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनका प्रतीकात्मक पुतला दहन किया।
"माफी से कम कुछ मंजूर नहीं"
प्रदर्शन के दौरान महापौर प्रहलाद पटेल ने कड़े लहजे में कहा
"राष्ट्रभक्तों का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वीर सावरकर जैसे महान व्यक्तित्व के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करना कांग्रेस की तुष्टीकरण की मानसिकता को दर्शाता है।"
भाजपा की मुख्य मांगें और चेतावनी
सार्वजनिक माफी: भाजपा ने मांग की है कि पार्षद सलीम बागवान और कांग्रेस नेतृत्व को सदन के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी।
कार्यवाही की चेतावनी
चेतावनी दी गई है कि जब तक माफी नहीं मांगी जाती, आगामी बैठकों में कांग्रेस को कड़े विरोध का सामना करना पड़ेगा।
तुष्टीकरण का आरोप: भाजपा नेताओं ने इसे कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति बताते हुए निंदा की।
राजनीतिक हलचल तेज
इस घटनाक्रम के बाद शहर का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। जहाँ एक ओर भाजपा इसे राष्ट्रभक्तों का अपमान बता रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रिया का इंतजार है। इस विवाद ने निगम की आगामी कार्यवाहियों पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं।