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 कुवैत एयरपोर्ट हमले में उज्जैन के मंजूर अहमद की मौत, भांजी की शादी में शामिल होने लौट रहे थे घर; बेटे से बोले थे- "नागदा लेने आ जाना"

 
 

उज्जैन,04 जून (इ खबर टुडे / ब्रजेश परमार)। विदेश में रहकर परिवार के बेहतर भविष्य के लिए तीन दशक तक मेहनत करने वाले उज्जैन के मंजूर अहमद का सपना घर लौटने से पहले ही टूट गया। कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए कथित ड्रोन और मिसाइल हमले में उज्जैन निवासी 50 वर्षीय मंजूर अहमद की मौत हो गई। मंजूर अहमद अपनी भांजी की शादी में शामिल होने के लिए भारत लौट रहे थे और कुछ ही घंटों में अपने परिवार के बीच होने वाले थे, लेकिन इससे पहले ही उनके निधन की दुखद खबर पहुंच गई। सूचना मिलते ही पूरे परिवार में मातम छा गया और शादी की खुशियां पल भर में गम में बदल गईं।

उज्जैन की राज रॉयल कॉलोनी निवासी मंजूर अहमद पिछले करीब 30 वर्षों से कुवैत में रहकर टेलरिंग का काम कर रहे थे। परिवार के बेहतर भविष्य और बच्चों की परवरिश के लिए उन्होंने अपना अधिकांश जीवन विदेश में ही बिताया। परिजनों के अनुसार वे कुवैत में कपड़ों की सिलाई का काम करते थे और वहीं से होने वाली आय से पूरे परिवार का खर्च चलता था।

घर में चल रही थीं शादी की तैयारियां
मंजूर अहमद की भांजी की शादी 8 जून को होना है। शादी को लेकर परिवार में उत्साह का माहौल था। रिश्तेदारों का आना-जाना शुरू हो चुका था और घर में तैयारियां अंतिम चरण में थीं। परिवार के लोग मंजूर अहमद के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे क्योंकि वे लंबे समय बाद किसी पारिवारिक समारोह में 

 

शामिल होने के लिए घर लौट रहे थे।
परिजनों ने बताया कि मंजूर अहमद की फ्लाइट कुवैत से भारत के लिए थी और वे उज्जैन पहुंचने वाले थे। परिवार ने उनके स्वागत की पूरी तैयारी कर रखी थी, लेकिन इसी बीच उनके निधन की खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया।

बेटे से हुई आखिरी बातचीत
मंजूर अहमद के बेटे मोहम्मद अनस ने बताया कि मंगलवार शाम उनकी अपने पिता से आखिरी बार बातचीत हुई थी। उस समय वे बेहद खुश और उत्साहित थे। उन्होंने फोन पर कहा था कि वे जल्द ही घर पहुंच जाएंगे और नागदा स्टेशन पर उन्हें लेने आ जाना।
अनस ने भावुक होकर बताया कि उनके पिता हमेशा परिवार की खुशियों को प्राथमिकता देते थे। पिछले 30 वर्षों से वे विदेश में रहकर केवल अपने परिवार के लिए मेहनत कर रहे थे। उन्होंने कभी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ा। परिवार को क्या पता था कि यह बातचीत उनकी आखिरी बातचीत साबित होगी।

अक्टूबर 2025 में आए थे आखिरी बार
परिजनों के मुताबिक मंजूर अहमद अक्टूबर 2025 में आखिरी बार उज्जैन आए थे। उस दौरान उन्होंने परिवार के साथ समय बिताया था और वापस लौटते समय कहा था कि अब जल्दी-जल्दी घर आते रहेंगे। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनकी अंतिम विदाई साबित होगी।

 

मंजूर अहमद अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और दो बेटियों का परिवार छोड़ गए हैं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी मुख्य रूप से उन्हीं के कंधों पर थी। उनकी असमय मौत से परिवार को भावनात्मक ही नहीं बल्कि आर्थिक आघात भी लगा है।

भारतीय दूतावास से मिली सूचना
परिजनों ने बताया कि घटना की जानकारी उन्हें भारतीय दूतावास के माध्यम से मिली। इसके बाद परिवार और रिश्तेदारों में शोक की लहर दौड़ गई। फिलहाल पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया जारी है। परिजनों के अनुसार शव अहमदाबाद पहुंचने के बाद उज्जैन लाया जाएगा, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

सरकार से सहायता की मांग
मंजूर अहमद के रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों ने मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से आर्थिक सहायता की मांग की है। उनका कहना है कि परिवार में कमाने वाले वे अकेले व्यक्ति थे और उनकी आय पर ही पूरे परिवार का जीवन निर्भर था। ऐसे में सरकार को परिवार की मदद के लिए आगे आना चाहिए।

 

परिजनों ने स्थानीय प्रशासन से अहमदाबाद से उज्जैन तक पार्थिव शरीर लाने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि इस कठिन समय में प्रशासनिक सहायता परिवार के लिए बड़ी राहत साबित होगी।