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 रतलाम में राजू हत्याकांड: दो आरोपियों को आजीवन कारावास, डीएनए और वीडियो साक्ष्य बने न्याय का आधार

 

 

​रतलाम, 19 अगस्त (इ खबर टुडे)। न्यायालय द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, रतलाम आशीष श्रीवास्तव ने वर्ष 2022 के बहुचर्चित राजू उर्फ राजपाल हत्याकांड का पटाक्षेप करते हुए दो मुख्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। थाना शिवगढ़ से जुड़े इस मामले में अभियोजन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान द्वारा प्रस्तुत वैज्ञानिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने आरोपी कालू और बंटी उर्फ कमलेश को दोषी ठहराया।

जानकारी के अनुसार मामला 04 नवंबर 2022 का है, जब ग्राम कालाखेत निवासी राजू उर्फ राजपाल को आरोपी मोटरसाइकिल पर जबरन बिठाकर ले गए थे। गुमशुदगी दर्ज होने के बाद जांच के दौरान जामड़ पाटली की तलाई के पास से मानव अवशेष बरामद हुए थे। एफएसएल (FSL) इंदौर में कराए गए डीएनए परीक्षण (DNA Test) में अवशेषों का मिलान मृतक के पिता के रक्त नमूनों से शत-प्रतिशत हुआ, जिससे यह साबित हुआ कि बरामद अवशेष राजू के ही हैं।

​डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्यों की मजबूत कड़ी
अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष गवाहों के बयानों से सिद्ध किया कि राजू को अंतिम बार कालू और बंटी के साथ देखा गया था। जप्त मोबाइल की फॉरेंसिक जांच में आरोपियों द्वारा राजू को ले जाने और मारपीट करने के स्पष्ट वीडियो प्रमाण मिले। आरोपियों की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त सामग्री और आरोपी कालू के कब्जे से प्रतिबंधित धारदार चाकू बरामद किया गया।

​सजा का विवरण
न्यायालय ने दोनों आरोपियों को ​धारा 302/34 भा.दं.सं. (हत्या) कालू और बंटी दोनों को आजीवन कारावास एवं ₹5,000-₹5,000 का अर्थदंड, ​धारा 365 भा.दं.सं. (अपहरण) दोनों को 5-5 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹2,000 का अर्थदंड, ​धारा 201 भा.दं.सं. (साक्ष्य मिटाना) दोनों को 3-3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹1,000 का अर्थदंड, ​आयुध अधिनियम (धारा 25-1B-b) केवल आरोपी कालू को 2 वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास एवं ₹2,000 का अर्थदंड से दंडित किया।

​सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अभाव में डीएनए रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों की अटूट श्रृंखला के कारण यह निर्णय न्याय व्यवस्था का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है।