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 जल्दी ही सकारात्मक प्रभाव दिखाने लगेगी देश में लागू नई शिक्षा नीति

 वरिष्ठ शिक्षाविद शोभा ताई  पैठनकर ने कहा
 

 

रतलाम,4 नवंबर (इ खबर टुडे)। देश में लागू की गई नई शिक्षा नीति अधिकांश शिक्षा संस्थानों में लागू कर दी गई है। नई शिक्षा नीति में विद्यार्थियों को मल्टी एन्ट्री और मल्टी एक्जिट के विकल्प दिए गए हैैं। इसके साथ ही नई शिक्षा नीति में छात्रों के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। नई शिक्षा नीति का प्रभाव जल्दी ही दिखाई देने लगा। 

उक्त बात वरिष्ठ शिक्षाविद और एमपीपीएससी की पूर्व सदस्य  सुश्री शोभा पैठनकर ने एक विशेष चर्चा के दौरान कही। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में प्रदेश अध्यक्ष समेत विभिन्न दायित्वों का निर्वहन कर चुकी सुश्री पैठनकर रविवार को रतलाम में एक शिक्षण संस्थान द्वारा आयोजित समारोह में शामिल होने आई थी। शिक्षण संस्थान के कार्यक्रम के बाद  वे इ खबर टुडे के कार्यालय भी आई जंहा उन्होंने नई शिक्षा नीति के बारे में विस्तार से चर्चा की। 

देश में लागू की गई नई शिक्षा नीति के बारे में चर्चा करते हुए उन्होने कहा कि मध्यप्रदेश उन राज्यों में शामिल है,जहां सबसे पहले नई शिक्षा नीति लागू की गई है। नई शिक्षा नीति में महाविद्यालयीन छात्रों को मल्टी एन्ट्री और मल्टी एक्जिट की सुविधा दी जा रही है। इसका अर्थ यह है कि कोई छात्र किसी भी वर्ष में अपने विषय बदल सकता है। कालेज के छात्रों को अब एक ही विषय में तीन वर्ष तक अध्ययन करना अनिवार्य नहीं है। उदाहरण के लिए विज्ञान विषय में प्रवेश लेने वाला कोई छात्र एक वर्ष विज्ञान की पढाई करने के बाद अगले वर्ष अपना विषय बदलकर इतिहास या वाणिज्य भी कर सकता है। अंतिम वर्ष में अगर वह फिर से विषय बदलना चाहे तो फिर से विषय बदल सकता है।

शोभा दीदी ने कहा कि छात्रों को प्रत्येक वर्ष के अध्ययन के लिए पृथक से प्रमाणपत्र जारी किए जाने की व्यवस्था भी नई शिक्षा नीति में की गई है। उन्होने कहा कि इस सुविधा से छात्र अपनी रुचि और क्षमता के हिसाब से विषयों का परिवर्तन कर सकते हैैं। 

प्राथमिक स्तर की शिक्षा में भी नई शिक्षा नीति से आमूल चूल परिवर्तन हो रहा है। नई शिक्षा नीति में पारंपरिक विषयों के ज्ञान के साथ विद्यार्थियों के कौशल विकास पर भी ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। उन्होने कहा कि विद्यालयों और महाविद्यालयों में पढाए जाने वाले विभिन्न विषयों को भी भारतीय दृष्टिकोण से तैयार किया जा रहा है। विशेष कर वामपंथी इतिहासकारों द्वारा लिखे गए पूर्वाग्र्रह से ग्र्रस्त इतिहास को अब भारतीय दृष्टिकोण से तैयार किया जा रहा है। जिसमें भारत के वास्तविक नायकों को पूरा स्थान दिया जा रहा है।

सुश्री पैठनकर ने कहा कि नई शिक्षा नीति का सकारात्मक प्रभाव आने वाले कुछ वर्षों में ही परिलक्षित होने लगेगा। जिससे विद्यार्थियों में गुणात्मक परिवर्तन दृष्टिगोचर होने लगेगा। बच्चों की प्राथमिक शिक्षा उनकी मातृभाषा में दिए जाने के प्रश्न पर सुश्री पैठनकर का कहना था कि नई शिक्षा नीति में इस बात का आग्र्रह किया जा रहा है कि प्रत्येक बच्चे को उसकी प्रारंंभिक शिक्षा उसकी मातृभाषा में ही दी जाए,परन्तु इसे अनिवार्य नहीं किया गया है। उनका कहना था कि इस सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपने एक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अभिभावकों पर उनके बच्चों की पढाई की भाषा को थोपा नहीं जा सकता। अभिभावक जिस भाषा में अपने बच्चों को पढाना चाहें,वे पढा सकते हैैं। परन््तु नई शिक्षा नीति इस बात का आग्र्रह जरुर करती है कि बच्चों को उनकी मातृभाषा में ही शिक्षा दी जाना चाहिए।