राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम को फटकार लगाई
उज्जैन, 12 अगस्त (इ खबर टुडे / ब्रजेश परमार)। बाबा महाकाल की नगरी के पुराण उल्लेखित सप्त सागरों का पानी गंदगी से सना हुआ है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की भोपाल सेंट्रल बेंच ने 4 अगस्त को दिए और आदेश में कहा कि 6 सरोवरों का पानी नहाने लायक भी नहीं बचा है। अधिकरण ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उज्जैन नगर निगम आयुक्त को तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने और सरोवरों के आसपास से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 4 सितंबर 2026 को होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन 7 सरोवरों में स्नान और पूजा का विशेष महत्व है हालांकि अब इनका पानी ही आस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण को सौंपी अपनी रिपोर्ट में मध्यप्रदेश प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड ने माना कि रत्नाकर सागर को छोड़कर बाकी 6 सरोवरों - रुद्र सागर, क्षीर सागर, पुरुषोत्तम सागर, विष्णु सागर, पुष्कर सागर और गोवर्धन सागर - का पानी मानकों के हिसाब से खराब है। रिपोर्ट में फीकल कोलीफॉर्म और टोटल कोलीफॉर्म की मात्रा केंद्रीय प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड की तय सीमा से कई गुना ज्यादा पाई गई। मध्यप्रदेश प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड ने ये भी कहा कि सरोवरों में बिना ट्रीटमेंट का पानी नहीं छोड़ा जा रहा।
अधिकरण नाराज - 'श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़'
राष्ट्रीय हरित अधिकरण के जस्टिस शियो कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी की बेंच ने तल्ख टिप्पणी की। "फीकल कोलीफॉर्म का ज्यादा होना सीधे तौर पर दर्शाता है कि सरोवरों में सीवेज मिल रहा है। मध्यप्रदेश प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम ने इसके कारण नहीं बताए और न ही कोई कार्रवाई की। प्रदूषित पानी को पूजा और अन्य कामों के लिए इस्तेमाल करने देना सीधे श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और आस्था से खिलवाड़ है।"
अतिक्रमण पर भी सवाल
याचिकाकर्ता प्रशांत मौर्य और बाकिर अली रंगवाला की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने कहा कि अनुविभागीय दंडाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी ने सप्त सागरों की डिमार्केशन कर रिपोर्ट दे दी है। उसमें अतिक्रमण की जानकारी भी है, लेकिन नगर निगम ने अब तक कुछ नहीं हटाया।
ये भी दिए निर्देश
1. 30 दिन में एक्शन: नगर निगम आयुक्त और MPPCB तुरंत सुधारात्मक उपाय करें।
2. साइंटिफिक तरीके अपनाएं: पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल हो।
3. दंडात्मक कार्रवाई: जो लोग सरोवरों को गंदा कर रहे हैं उन पर जुर्माना और पर्यावरण क्षति वसूली हो।
4. सिंहस्थ को ध्यान में रखें- उज्जैन में निकट भविष्य में सिंहस्थ होना है, इसलिए सफाई प्राथमिकता पर हो।
ये हैं सप्त सागर
रुद्र सागर, क्षीर सागर, पुरुषोत्तम सागर, विष्णु सागर, पुष्कर सागर, गोवर्धन सागर और रत्नाकर सागर हैं। इनका पुराणों में भी उल्लेख मिलता है। हाल ही में पुरूषोत्तम मास में श्रद्धालुओं ने जमकर यहां पूजन अर्चन किया था।
पूर्व में भी 3 करोड का जुर्माना हो चुका है
मामले के याचिकाकर्ता बाकीरअली रंगवाला ने कहा कि वर्ष 2022 से चल रहे इस मामले में पूर्व में अधिकरण 3 करोड का जुर्माना कर चुका है।अधिकरण ने मुख्य सचिव को सप्त सागरों की स्थिति बताने के लिए कहा गया था। गोवर्धन सागर की डिजिटल नपती हो चुकी है। पुष्करण सागर काफी छोटा है।