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 रतलाम: प्रेमिका की जिद से परेशान होकर की थी हत्या, आरोपी को न्यायालय ने सुनाई दोहरे आजीवन कारावास की सजा

 

 

​रतलाम, 17 अक्टूबर(इ खबर टुडे)।  जिले के रावटी  में हुए एक सनसनीखेज हत्याकांड का फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया है। अनुसूचित जनजाति की महिला की हत्या के मामले में विचारण उपरांत न्यायालय ने आरोपी को दोहरे आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है। इस कड़े फैसले से न्याय की जीत हुई है और अपराधियों में कड़ा संदेश गया है।


यह  था पूरा मामला?

​प्रकरण के अनुसार, घटना 6 जुलाई 2025 की है। मृतिका रावटी गई थी और वापस नहीं लौटी। इसके अगले दिन यानी 7 जुलाई 2025 को उसकी लाश ग्राम पाडलियाघाटा (शिवगढ़-बाजना रोड, सोगल डुंगरी घाट रोड के किनारे) बरामद हुई थी। पुलिस ने मृतिका की शिनाख्त उसके पति और भाई के माध्यम से करवाई।

​जांच के दौरान एक चश्मदीद गवाह ने पुलिस को बताया कि उसने घटना से पहले मृतिका को आरोपी दशरथ गुर्जर के साथ मोटरसाइकिल पर बैठकर रावटी से बाजना की तरफ जाते देखा था।


​पूछताछ में आरोपी ने उगला सच

​पुलिस ने संदेही  आरोपी दशरथ पिता बल्लू गुर्जर (उम्र 46 वर्ष, निवासी- ग्राम बायडी, तहसील सैलाना, थाना शिवगढ़, जिला रतलाम) को हिरासत में लेकर पूछताछ की। आरोपी ने अपना जुर्म कबूल करते हुए पुलिस को बताया कि मृतिका उसकी प्रेमिका थी और उसने फोन कर मिलने बुलाया था। ​आरोपी उसे मोटरसाइकिल (होंडा शाइन) पर बिठाकर सोगल डुगरी घाट के सुनसान जंगल में ले गया। वहां संबंध बनाने के बाद जब मृतिका ने उसके साथ पत्नी बनकर घर पर रहने की जिद की, तो आरोपी ने घर पर पत्नी-बच्चों का हवाला देकर उसे जाने को कहा। मृतिका के न मानने पर और जिद करने पर गुस्से में आकर आरोपी ने उसके ही दुपट्टे से उसका गला घोंटकर हत्या कर दी और उसका मोबाइल लेकर फरार हो गया था।


​न्यायालय का कड़ा निर्णय

​थाना शिवगढ़ में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 103(1) एवं एससीएसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत मामला दर्ज कर पुलिस ने संपूर्ण विवेचना के बाद अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया था।

जिला न्यायालय के विशेष न्यायाधीश, अ.जा./अ.ज.जा. (अत्या.निवा.) अधिनियम, रवीन्द्र प्रताप सिंह चुण्डावत की अदालत ने दिनांक 13.10.2026 को दिए गए ऐतिहासिक फैसले में अभियोजन की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों, लिखित और वैज्ञानिक साक्ष्यों को पुख्ता मानते हुए आरोपी दशरथ को दोषी ठहराया। न्यायालय ने आरोपी को: ​भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 103(1) के तहत आजीवन कारावास एवं 1,000/- रुपये का अर्थदंड तथा 
​एससीएसटी एक्ट की धारा 3(2)(v) के तहत आजीवन कारावास एवं 1,000/- रुपये का अर्थदंड से दण्डित किया।
​इस महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक योगेश कुमार तिवारी द्वारा सफलतापूर्वक की गई।