स्पंदन संस्था द्वारा आभासीय साहित्यिक संध्या का सफल आयोजन; राष्ट्रकवि 'दिनकर' को दी गई काव्यांजलि
रतलाम, 05 अक्टूबर (इ खबर टुडे)। साहित्यिक संस्था 'स्पंदन' के तत्वावधान में गत दिवस रविवार को एक भव्य आभासीय साहित्यिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत लखनऊ की युवा साहित्यकार वैशाली रस्तोगी द्वारा प्रस्तुत मधुर सरस्वती वंदना "स्वर पे सवार होके.. कंठ का श्रृंगार होके" से हुई।
यह साहित्यिक संध्या राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह 'दिनकर' की जयंती को समर्पित रही। उज्जैन की साहित्यशिल्पी श्रीमती मनीषा राठी ने दिनकर जी के जीवन और साहित्य में उनके अप्रतिम योगदान पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात लंदन से जुड़े वरिष्ठ साहित्यकार विवेक रंजन श्रीवास्तव ने दिनकर जी की प्रसिद्ध कविता 'चाँद का कुरता' और गुरुग्राम की प्रीति अग्रवाल ने 'शक्ति और क्षमा' का सुंदर पाठ किया। वहीं, वैशाली रस्तोगी ने दिनकर जी की शैली में रचित अपनी रचना 'हुंकार उठी बेड़ी टूटी' प्रस्तुत कर समां बाँध दिया।
कार्यक्रम में समकालीन साहित्य सृजन का विविध रंग देखने को मिला। आभा माहेश्वरी अलीगढ़ ने अपनी रचना 'आत्मशक्ति' से श्रोताओं को आत्मबल से ओतप्रोत किया। मनीषा राठी उज्जैन ने कविता 'धर्म अनुसंधान करो हे! अर्जुन' के माध्यम से कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए कर्म प्रधानता के अमर संदेश को मार्मिक रूप से प्रस्तुत किया। विवेक रंजन श्रीवास्तव लंदन ने श्राद्धपक्ष पर केंद्रित लघुकथा 'श्रद्धा और सुमन' प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया।
प्रीति अग्रवाल गुरुग्राम ने अपने संस्मरण 'पहली तीज' में स्वर्गीय सासू माँ के साथ बिताए आत्मीय पलों को साझा किया। प्रशान्त माहेश्वरी संस्थापक एवं अध्यक्ष, स्पंदन ने अपनी रचना 'गंध स्वाभिमान की' के जरिए गाँव की संघर्षशील महिला की जीवटता का जीवंत चित्रण किया।
कार्यक्रम में इंदौर की युवा साहित्यकार सुश्री दिव्या भट्ट 'स्वयं', लखनऊ के व्यंग्यकार श्री अयोध्या प्रसाद एवं भोपाल की मनोवैज्ञानिक परामर्शदात्री डॉ. अनुपमा माहेश्वरी की गरिमामयी उपस्थिति एवं प्रस्तुतियां सराहनीय रहीं।
अंत में प्रीति अग्रवाल द्वारा व्यक्त किए गए आभार प्रदर्शन के साथ यह आभासीय साहित्यिक संध्या आनंद और उत्साह के वातावरण में संपन्न हुई।