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 स्पंदन द्वारा शिक्षक दिवस पर विशेष आभासी साहित्यिक संध्या आयोजित

 

​उज्जैन,07 सितंबर(इ खबर टुडे)। साहित्यिक मंच 'स्पंदन' द्वारा 5 सितंबर 2026 को शिक्षक दिवस के अवसर पर एक विशेष आभासी साहित्यिक संध्या का भव्य आयोजन किया गया।
​कार्यक्रम का शुभारंभ दुर्ग (छत्तीसगढ़) की दीक्षा चौबे द्वारा प्रस्तुत मधुर सरस्वती वंदना से हुआ। तत्पश्चात कानपुर की डॉ. मधु प्रधान ने गुरु वंदना पर आधारित दोहों का सुंदर गायन कर समां बांधा। इस अंतरराष्ट्रीय आभासी मंच पर लंदन से जुड़े विवेक रंजन श्रीवास्तव ने अपनी रचना 'तुम्हें प्रणाम गुरूजी' की प्रभावशाली प्रस्तुति दी।

​कार्यक्रम में देश-विदेश के अनेक साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से गुरु महिमा और समाज में उनके योगदान को रेखांकित किया।

​दीक्षा चौबे (दुर्ग): अपनी कृति 'ज्ञान का दीप जलाते शिक्षक' के ज़रिए ज्ञान प्रसार में शिक्षक की भूमिका को स्पष्ट किया।

​श्रीमती फाल्गुनी रोहित बियाणी (उज्जैन): रचना 'जो जीवन दर्शन को जाने वही सनातन है' के माध्यम से सनातन परंपरा और जीवन दर्शन के गहन संबंधों को अभिव्यक्त किया।

​मोनिका डागा (चेन्नई): 'शरणागत जो आये गुरु की' रचना से सभी श्रोताओं का ध्यान आकृष्ट किया।

​वैशाली रस्तोगी (लखनऊ): पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में योगदान को सुंदर ढंग से रेखांकित किया।

​वैदेही कोठारी (रतलाम): अपनी लघुकथा 'तस्वीर' के माध्यम से व्यक्ति के विकास में माँ की भूमिका को दर्शाया।

​सुश्री दिव्या भट्ट (इंदौर) व ऋचा उपाध्याय (लखनऊ): दिव्या भट्ट की 'गुरु पर दोहावली छंद' और ऋचा उपाध्याय की रचना 'हर घर गोकुल' की प्रस्तुति बेहद मनमोहक रही।

​मधु पाठक (लखनऊ) व प्रीति अग्रवाल (गुरुग्राम): मधु पाठक की कृति 'परिवर्तन' और प्रीति अग्रवाल की रचना 'स्कूल के वो दिन' ने छात्र जीवन की मीठी यादों को ताज़ा कर दिया।

​संस्था के संस्थापक एवं अध्यक्ष प्रशांत माहेश्वरी (उज्जैन) ने अपनी कविता 'गुरु' के माध्यम से चरित्र निर्माण और संपूर्ण व्यक्तित्व विकास में गुरु के महत्व पर प्रकाश डाला। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने छात्र-शिक्षक संबंधों को गहराई से समझने के लिए 1954 की प्रसिद्ध फिल्म 'जागृति' देखने का सुझाव दिया।

​कार्यक्रम का समापन गुरुग्राम की प्रीति अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन और आभार प्रदर्शन के साथ सहर्ष हुआ।