घोड़ा चौराहा चौपाटी पर घमासान: निगम के अल्टीमेटम के खिलाफ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे दुकानदार, गरमाई सियासत
रतलाम, 15 जुलाई (इ खबर टुडे)। शहर के सबसे व्यस्ततम और प्रसिद्ध घोड़ा चौराहा चौपाटी को हटाने के प्रशासनिक फरमान के बाद शहर में सियासी और प्रशासनिक घमासान चरम पर पहुंच गया है। नगर निगम द्वारा चौपाटी खाली करने के लिए दिए गए महज चार दिन के अल्टीमेटम के विरोध में दुकानदारों ने अपनी दुकानें पूरी तरह बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। पिछले दो दिनों से जारी इस बेमियादी हड़ताल ने अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले लिया है।
चौपाटी को हटाने की कार्रवाई के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, घोड़ा चौराहा चौपाटी पर लगने वाली अधिकांश गुमटियां शहर के कई रसूखदार कांग्रेस नेताओं की बताई जा रही हैं। वहीं, कुछ दुकानों पर कांग्रेस नेताओं से सांठगांठ रखने वाले रेलवे में पदस्थ कर्मचारियों के कब्जे की बात भी सामने आई है।
हकीकत यह है कि मैदान में अपनी जान-जोखिम में डालकर दुकान चलाने वाले छोटे और आम दुकानदार तो सिर्फ दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। वे हर महीने इन रसूखदार 'मालिकों' को मोटा किराया चुकाकर जैसे-तैसे अपनी आजीविका चला रहे हैं। निगम की इस बेदखली कार्रवाई से अब इन रसूखदारों की मोटी कमाई पर संकट खड़ा हो गया है, यही वजह है कि पर्दे के पीछे से इस आंदोलन को हवा दी जा रही है।
निगम का सख्त रुख: चार दिन में खाली करें जगह, आंदोलन के मंच पर जुटे कांग्रेसी दिग्गज
नगर निगम ने अपनी कार्रवाई को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। निगम द्वारा जारी कड़े आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पूरी चौपाटी को चार दिन के भीतर हर हाल में खाली कर दिया जाए और दुकानदार अपनी गुमटियां तय स्थान पर शिफ्ट कर लें। इस आदेश से भड़के दुकानदारों और कांग्रेस नेताओं ने नगर निगम के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए धरना शुरू कर दिया है। आंदोलन के लिए सजे मंच पर कांग्रेस के कई बड़े और दिग्गज नेता अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। कांग्रेसी नेताओं ने इस पूरी कार्रवाई को 'तानाशाही' बताते हुए विस्थापित हो रहे दुकानदारों को अपना खुला समर्थन देने का ऐलान किया है।
यातायात का बड़ा सिरदर्द बनी चौपाटी, पुलिस की 'कमाई' का जरिया!
घोड़ा चौराहे पर चौपाटी की वजह से शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। चौपाटी पर रोजाना जुटने वाली भारी भीड़ और सड़क पर बेतरतीब खड़ी गाड़ियां आधे से ज्यादा मार्ग को अवरुद्ध कर देती हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस अव्यवस्था से यातायात पुलिस को भी अच्छी-खासी 'कमाई' का मौका मिल जाता है, क्योंकि अक्सर यहां आने वाले ग्राहकों की गाड़ियां पुलिस कार्रवाई का शिकार बनती हैं। इसी ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था को सुगम बनाने के लिए प्रशासन इस स्थान को खाली कराने पर अडिग है।
स्टेडियम मार्केट में 'MP 43' फूड जोन तैयार, लॉटरी से होगा पारदर्शी आवंटन
दूसरी ओर, नगर निगम प्रशासन ने शहर के व्यवस्थित विकास के लिए अपनी तैयारी पूरी कर ली है। निगम ने स्टेडियम मार्केट में एक सर्वसुविधायुक्त और आधुनिक 'MP 43' फूड जोन तैयार किया है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, घोड़ा चौराहा चौपाटी से विस्थापित होने वाले सभी दुकानदारों को इस नए फूड जोन में शिफ्ट होने का अवसर दिया जा रहा है। दुकानों का आवंटन पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ लॉटरी सिस्टम के माध्यम से किया जाएगा, ताकि किसी भी छोटे दुकानदार के साथ भेदभाव न हो और रसूखदारों का एकाधिकार खत्म हो सके।
आगे क्या?
अब देखना यह बेहद दिलचस्प होगा कि क्या पेट पालने वाले वास्तविक छोटे दुकानदार नगर निगम के इस पारदर्शी ऑफर को स्वीकार कर आधुनिक 'MP 43' फूड जोन की ओर रुख करते हैं, या फिर रसूखदारों के दबाव में घोड़ा चौराहे पर यह सियासी और प्रशासनिक घमासान और लंबा खिंचता है।