पटवारी विवाद गहराया: रतलाम में 4 पटवारियों की सेवा समाप्त, विरोध में पूरे प्रदेश के पटवारियों ने सरकारी व्हाट्सएप ग्रुप छोड़े, ऑनलाइन काम ठप
रतलाम, 07 अक्टूम्बर(इ खबर टुडे)। स्वामित्व योजना में निष्पादक (एग्जीक्यूटर) के रूप में कार्य करने को लेकर शासन और पटवारियों के बीच 17 सितंबर से चला आ रहा टकराव अब बेहद उग्र रूप ले चुका है। शासन- प्रशासन द्वारा निलंबन और सेवा समाप्ति की कार्रवाई से आक्रोशित होकर मध्य प्रदेश पटवारी संघ (शाखा रतलाम) ने आज 7 अक्टूबर से पूरे जिले और प्रदेश भर में सभी ऑनलाइन राजस्व कार्य पूरी तरह बंद कर दिए हैं। इसके साथ ही पटवारियों ने सभी सरकारी व्हाट्सएप ग्रुप भी छोड़ दिए हैं।
मध्य प्रदेश पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष गोपाल रावत ने बताया कि इसी विवाद के चलते रतलाम जिले में 4 परिवीक्षाधीन (प्रोबेशनर) पटवारियों की सेवा समाप्त कर दी गई है, जबकि अन्य जिलों में भी निलंबन की कार्रवाई की गई है। शासन के इस रवैये से पटवारियों में भारी गुस्सा है।
योजना से आपत्ति नहीं, भूमिका और कानूनी खतरों पर चिंता
पटवारी संघ ने स्पष्ट किया कि वे सरकार की किसी योजना के खिलाफ नहीं हैं और पहले से ही पीएम किसान, फार्मर रजिस्ट्री समेत 56 विभागों के काम संभाल रहे हैं। यह योजना पंचायती राज विभाग की है, राजस्व की नहीं; फिर भी पटवारी काम करने को तैयार हैं। लेकिन असली आपत्ति योजना में पटवारी को 'निष्पादक' बनाए जाने से है।
पटवारियों के अनुसार, मौके पर बने पक्के मकानों को कागजों पर केवल 'भूखंड' बताकर रजिस्ट्री करवाना मिथ्या दस्तावेजीकरण (गलत दस्तावेज तैयार करना) की श्रेणी में आता है। ऐसे में निष्पादक (पटवारी), क्रेता और उप-पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) तीनों पर एफआईआर दर्ज होने और जेल जाने का कानूनी खतरा बना रहता है।
त्रुटियाँ और नक्शों का अभाव
संघ ने यह भी उजागर किया कि स्वामित्व योजना के तहत नाम, रकबा, चौहद्दी में कई गलतियाँ हैं और एक ही मकान दो लोगों के नाम दर्ज होने जैसी ढेरों त्रुटियाँ लंबित हैं। बिना सुधार के रजिस्ट्री होने से जनता को कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ेंगे। इसके अलावा, पटवारियों के पास जमीनी स्तर पर संपत्ति के नक्शों की न तो हार्ड कॉपी उपलब्ध है और न ही सॉफ्ट कॉपी।
कल से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
पटवारी संघ ने चेतावनी दी है कि प्रांतीय निकाय के निर्देशानुसार, यदि रतलाम में की गई 4 पटवारियों की सेवा समाप्ति और अन्य जिलों में किए गए निलंबन के आदेश तत्काल वापस नहीं लिए जाते हैं, तो कल 8 अक्टूबर से रतलाम जिले के समस्त पटवारी बिना किसी पूर्व सूचना के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे और 'टोटल शटडाउन' कर पूर्ण रूप से काम बंद कर देंगे।