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हाई सिक्योरिटी ज़ोन में सनसनी: विश्राम गृह के बाहर 'भारत सरकार' लिखे वाहन में अर्धनग्न मिला ड्राइवर का शव

​हत्या या आत्महत्या? जीआरपी व पुलिस दोनों एंगल से जांच में जुटी; आरपीएफ-जीआरपी की गश्त पर उठे सवाल 
 

 

रतलाम, 07 अक्टूबर (इ खबर टुडे)। रतलाम जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 7 स्थित रेलवे अधिकारी विश्राम गृह के बाहर बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब वहां खड़े 'भारत सरकार' लिखे एक वाहन में संदिग्ध परिस्थितियों में ड्राइवर का अर्धनग्न शव बरामद हुआ। मृतक की पहचान हिम्मत सिंह (37), पिता दातार सिंह (निवासी बंगला नंबर 1686, रोड नंबर 08, ओल्ड रेलवे कॉलोनी व स्थाई निवासी जवाहर नगर) के रूप में हुई है। वह रेलवे में अटैच एक बोलेरो गाड़ी चलाता था और पिछले कुछ दिनों से घर से लापता था।


जानकारी के अनुसार, वाहन मालिक प्रेम सिंह पिता उमराव सिंह रावत (57, निवासी सर्वोदय नगर, रतलाम) ने सुबह करीब 09:30 बजे जीआरपी चौकी पर सूचना दी कि प्लेटफॉर्म नंबर 7 के बाहर मालवा रेस्ट हाउस रोड पर खड़ी उनकी बोलेरो कार (रजिस्ट्रेशन नंबर MP-43 ZB-9255) की बीच वाली सीट पर उनका चालक हिम्मत सिंह मृत अवस्था में पड़ा है। सूचना मिलते ही पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रण में लेकर जांच शुरू की।

​परिजन थे परेशान, कई दिनों से था लापता
सूत्रों के मुताबिक हिम्मत पिछले कुछ दिनों से अपने घर नहीं पहुंचा था। परिजन उसकी लगातार तलाश कर रहे थे और उसकी गुमशुदगी को लेकर काफी परेशान थे। बुधवार को जब गाड़ी के मालिक ने वाहन को विश्राम गृह के बाहर देखा और पुलिस को सूचित किया, तब इस घटना का खुलासा हुआ।

​प्रथम दृष्टया आत्महत्या का मामला, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
मामले की पुष्टि करते हुए जीआरपी थाना प्रभारी सोहनलाल पाटीदार ने बताया कि "प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। हालांकि, शव अर्धनग्न अवस्था में मिलने और घटना स्थल की परिस्थितियों को देखते हुए हर पहलू पर गहन जांच की जा रही है। मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।" फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

​सीसीटीवी व कॉल डिटेल खंगाल रही पुलिस
मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस मृतक के मोबाइल की कॉल डिटेल (CDR) और आसपास लगे सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाल रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हिम्मत आखिरी बार किससे मिला था और गाड़ी में कब दाखिल हुआ था।

​घटना से उठे गंभीर सवाल
इस तरह की ​घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए है। प्लेटफॉर्म नंबर 7 और अधिकारी विश्राम गृह हाई-सिक्योरिटी ज़ोन माने जाते हैं, जहां अधिकारियों और आरपीएफ / जीआरपी कर्मियों की लगातार आवाजाही रहती है। ऐसे में कई दिनों से लापता ड्राइवर का शव वाहन के अंदर रहा और किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी? शव का अर्धनग्न अवस्था में मिलना मामले को बेहद संदिग्ध बनाता है। क्या ड्राइवर ने किसी मानसिक तनाव में यह कदम उठाया या इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश है? 'भारत सरकार' लिखे वाहन में इस प्रकार की घटना होना वाहनों की मॉनिटरिंग और सुरक्षा गश्त पर गंभीर सवाल खड़े करता है।