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रतलाम / नियमों की उडती रही धज्जियां, दिन भर बन्धक बना रहा शहर

इद मिलादुन्नबी के जुलूस में नियम हुए तार तार
 

 

रतलाम,26 अगस्त(इ खबरटुडे)। ईद मिलादुन्नबी के मौके पर मुस्लिम समुदाय द्वारा निकाले गए जुलूस के दौरान पूरा दिन शहर एक तरह से बन्धक बना रहा, वहां सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए तय किए गए नियमों की दिन भर धज्जियां उडती रही। डीजे पर रोक के बावजूद जबर्दस्त तेज आवाज में डीजे बजाए जाते रहे, जिससे कई तरह की समस्याएं सामने आई। यहां तक कि एक व्यक्ति को अपनी जान से भी हाथ धोना पडा।

इद मिलादुन्नबी के जुलूस को लेकर प्रशासन द्वारा किए गए सारे इंतजाम धरे रह गए। पुलिस प्रशासन ने जुलूस के मद्देनजर ट्रैफिक प्लान बनाकर यातायात को सुचारु रखने की कोशिश की थी,लेकिन जब जुलूस निकाला गया तो शहर की कई सडक़ों पर यातायात जाम हो गया और लोगों को घण्टों ट्रैफिक जाम में फंसे रहना पडा। दोबत्ती चौराहे पर तो स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई थी। दोबत्ती चौराहे पर वाहन घण्टों तक जाम में रहे।

इस तरह के आयोजनों के लिए प्रशासन द्वारा दी जाने वाली अनुमति में स्पष्ट रुप से उल्लेख किया जाता है कि डीजे का उपयोग पूणर्त: प्रतिबन्धित है। लेकिन इसके बावजूद जुलूस में न सिर्फ कई सारे डीजे बजते रहे,बल्कि इन डीजे के कर्कश तेज शोर के कारण कई स्थानों के शीशे तक चटक गए। माणकचौक इत्यादि मुख्यबाजारो ंमें कई दुकानों के शीशे इस तेज शोर से चटकने की खबरें सामने आई है। कई दुकानों में रखा सामान इस तेज आवाज के कम्पनों के कारण गिर गया। 

कांग्रेस पार्षद नासिर कुरैशी की जुलूस के दौरान ह्रदयाघात से हुई मौत को भी डीजे के कर्कश शोर से ही जोडकर देखा जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक डीजे पर बजने वाला साउण्ड इतना तेज था कि जुलूस में शामिल लोग भी कानों में उंगलिया डालकर जुलूस में चल रहे थे।

पुलिस हुई लाचार
जुलूस में एक साथ कई डीजे बजाए जाने के बाद भी जुलूस के साथ चल रहे पुलिस अधिकारी लाचार नजर आ रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट प्रतिबन्ध के बावजूद डीजे को बन्द कराने की कोई कोशिश नहीं की। शहर के तमाम प्रमुख बाजार और व्यस्त मार्ग इस जुलूस के कारण बुरी तरह प्रभावित हुए। पूरा शहर एक तरह से बन्धक बन गया था। जुलूस से प्रारंभ होने से लेकर शाम को समाप्त होने तक शहर का यातायात अस्तव्यस्त बना रहा और तमाम व्यापारिक गतिविधियां ठप्प रही।

जुलूस के दौरान नियमों के खुले उल्लंघन को लेकर अब लोगों में आक्रोश व्याप्त है। यह सवाल पूछा जा रहा है कि नियमों का उल्लंघन किए जाने पर जुलूस आयोजकों के विरुद्ध कोई कार्यवाही होगी या नहीं? पार्षद की दुखद मृत्यु के बाद जुलूस में कुछ समय के लिए डीजे बन्द कर दिए गए थे, लेकिन कुछ समय बाद फिर से तेज आवाजें गूंजने लगी थी। प्रश्न यह भी उठाया जा रहा है कि अल्पसंख्यक समुदाय का जुलूस बहुसंख्यक समुदाय के क्षेत्रों से निकाले जाने की 

अनुमति क्यों दी गई थी?
उल्लेखनीय है कि दो दिन पूर्व ही सकल हिन्दू समाज की ओर से जिला प्रशासन को एक ज्ञापन देकर मांग की गई थी, कि अल्पसंख्यक समाज के इस जुलूस को बहुसंख्यक समुदाय के क्षेत्रों से निकलने की अनुमति नहीं दी जाए। ज्ञापन में यह भी मांग की गई थी कि जुलूस के दौरान बनाए जाने वाले बडे आकारों के स्वागत मंचों को दी गई अनुमति और आयोजकों द्वार इस सम्बन्ध में विभिन्न विभागों से प्राप्त की गई अनुमतियों की जांच करवाई जाए। ज्ञापन में आरोप लगाया गया था कि कई सारे मंच और अन्य अस्थाई टेंट संरचनाएं बिना अनुमति के नियमों का उल्लंघन कर लगाए जा रहे हैैं।