पुराने बाबू की सनक को ढोते दूसरे बाबू,गुलाब चक्कर का रास्ता बाधित,जनता बेवजह परेशान
** रास्ता बंद करने से कोई लाभ नहीं
** हज़ारो लोगो को हो रही है परेशानी
रतलाम,27 मई (इ खबरटुडे)। जिले में कलेक्टर बनकर आने वाले एक पुराने बाबू की सार्वजनिक मार्ग को बाधित करने की सनक को बाद में आए बाबू दूर करने को तैयार नहीं है और नतीजा यह है कि शहर के हजारों लोग सार्वजनिक मार्ग के बाधित होने से परेशान हो रहे है। हद तो ये है कि सत्तारुढ दल के जन प्रतिनिधि और नेता भी पुराने बाबू की इस सनक को ठीक करने के लिए कोई कोशिश करते नजर नहीं आते।
ये कहानी है गुलाब चक्कर से लगे हुए मार्ग को बन्द किए जाने की। वर्ष 2015 में बी चन्दशेखर रतलाम के कलेक्टर बनकर आए थे। उस समय कलेक्टोरेट कार्यालय गुलाब चक्कर के पास ही पुराने भवन में हुआ करता था। कलेक्टर बी चन्द्रशेखर (चन्द्रशेखर बोरकर) को गुलाब चक्कर में मुक्ताकाश बनाने की सनक सूझी। अपनी इस सनक के चलते उन्होने शहर के कई भू माफियाओं से आर्थिक सहयोग लेकर गुलाब चक्कर में एक मंच बनवाया और इस मुक्ताकाश मंच को चलाने के लिए गुलाब चक्कर के चारो ओर बनी सडक को बीच में बेरिकेटिंग लगाकर बन्द करवा दिया। कलेक्टर ने अपनी सनक के चलते इस मुक्ताकाश मंच पर कुछ साहित्यिक कार्यक्रम भी करवाए,लेकिन अपनी सनक के चलते वे यह भूल ही गए थे कि गुलाब चक्कर में लगे सैकडों पेडों पर हजारों परिन्दों का बसेरा है। ये हजारों परिन्दे शाम होने पर अपने अपने पेडों पर लौट आते है और पेडों पर लौटने के बाद पेडों से लगातार बीट गिराते रहते हैैं। बी चन्द्रशेखर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने आए लोगों को गुलाब चक्कर के पेडों पर रहने वाले परिन्दों की बीट का शिकार बनना पडा और उनके कपडें इस वजह से खराब हो गए। तब जाकर लोगों को समझ में आया कि गुलाब चक्कर में मंच बनाकर साहित्यिक कार्यक्रम नहीं किए जा सकते। यदि गुलाब चक्कर का उपयोग ही करना है तो इसके बीच में बने हाल में कार्यक्रम किए जा सकते है। इस हाल में परिन्दों द्वारा कोई परेशानी उत्पन्न नहीं की जाती।
तत्कालीन कलेक्टर बी चन्द्रशेखर ने अपनी सनक के चक्कर में ना केवल गुलाब चक्कर वाली सडक़ को बीच में से बन्द करवा दिया बल्कि पुराने एसडीएम आफिस की ओर जाने वाली सडक़ पर भी स्थाई बैरिकेट्स लगाकर उसे भी बन्द करवा दिया था। यह भी कहा जाता है कि बी चन्द्रशेखर हिन्दू विरोधी मानसिकता वाले अधिकारी थे और वे चाहते थे कि कालिका माता मन्दिर जाने वाले मार्गो को येन केन प्रकारेण बाधित कर दिया जाए ताकि कालिका
माता के दर्शनों के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पडे। परिणाम यह हुआ कि कालिका माता जाने वाले मार्गों को नई योजना के नाम पर बाधित कर दिया गया।
कुछ ही समय के बाद कलेक्टर बी चन्द्रशेखर का स्थानान्तरण हो गया और ताजा जानकारी के मुताबिक अब वे स्वंय ही शासकीय सेवा से मुक्त हो चुके है। लेकिन उनकी सनक की परेशानी रतलाम के नागरिक अब भी झेल रहे है। गुलाब चक्कर के चारों ओर बने रास्ते को बीच में से बाधित किया हुआ है।
तत्कालीन कलेक्टर बी चन्द्रशेखर के स्थानान्तरण को अब करीब एक दशक का समय बीत चुका है। इस दौरान कई सारे नए बाबू आए और आकर चले गए। वर्तमान कलेक्टर से पहले आए कलेक्टर राजेश बाथम ने गुलाब चक्कर को नए ढंग से व्यवस्थित करने का प्रयास किया था। उनका प्रयास काफी हद तक सफल रहा था और वर्तमान में गुलाब चक्कर के बीच बने सभागृह में कई नई प्रतिभाओं को मंच मिलने लगा है। लेकिन राजेश बाथम ने भी बाधित किए गए रास्तों को खुलवाने के बारे में कोई विचार नहीं किया।
गुलाब चक्कर के चारो ओर बनाया गया मार्ग अब भी बीच में से बाधित है। बी चन्द्रशेखर द्वारा दिए गए मौखिक आदेश पर सार्वजनिक मार्ग को बाधित किया गया था। वह आज भी उसी तरह बन्द है। मार्ग को रोके जाने की वजह से प्रतिदिन पुराने कलेक्टोरेट परिसर के मच्छी दरवाजे पर दिन में दर्जनों बार जाम लगता है। दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
ना तो कलेक्टोरेट के नए बाबू और ना ही जनप्रतिनिधि, बाधित किए गए इस मार्ग की बाधा को हटाने के बारे में कोई भी विचार करने को तैयार नहीं है । जबकि वास्तविकता यह है कि सार्वजनिक मार्ग को बाधित किया जाना दण्डनीय अपराध है। नगर निगम प्रशासन और जिला प्रशासन को फौरन बाधित किए गए इन सभी मार्गों को खुलवाना चाहिए ताकि यहां उत्पन्न हो रहे यातायात दबाव को कम किया जा सके और कालिका माता के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को किसी परेशानी का सामना ना करना पडे।
इन मार्गों का बाधित रहना शहर के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और नेताओं की योग्यता और क्षमता पर भी बडा प्रश्नचिन्ह है। स्थानान्तरित होने वाले बाबू अपनी सनक के चलते उटपटांग निर्णय कर लेते है,लेकिन इस तरह के उटपटांग निर्णयों पर रोक लगाकर उन्हे सुधारने की जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों पर है। अगर वे किसी बाबू की सनक को एक दशक तक ढो रहे है तो उनकी समझदारी पर भी सवालिया निशान खडे होते है।