रतलाम पुलिस का बड़ा प्रहार: मल्टी-स्टेट साइबर फ्रॉड के 'म्यूल अकाउंट' गिरोह का भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार
केंद्रीय गृह मंत्रालय के Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) और NCRP पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस अधीक्षक श्री अमित कुमार के निर्देशन में सायबर सेल टीम संदिग्ध बैंक खातों की निगरानी कर रही थी। जांच के दौरान फेडरल बैंक का एक खाता संदिग्ध पाया गया, जो रतलाम के माणकचौक निवासी प्रथम मित्तल के नाम पर था। जब पुलिस ने खाते के लेन-देन की पड़ताल की, तो पता चला कि 25 मार्च 2026 को इस खाते में अचानक ₹47,75,301 की भारी-भरकम राशि जमा हुई थी।
तमिलनाडु के 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम से कनेक्शन
जांच में खुलासा हुआ कि यह राशि तमिलनाडु के कोयंबटूर निवासी के.सी. श्रीधर से की गई ठगी का हिस्सा थी। श्रीधर को जालसाजों ने "डिजिटल अरेस्ट" का डर दिखाकर कुल ₹67.75 लाख की चपत लगाई थी। ठगी गई राशि का एक बड़ा हिस्सा रतलाम के इस म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर किया गया था।
कमीशन के लालच में खोलते थे खाते
गिरफ्तार आरोपी प्रथम मित्तल ने पूछताछ में कबूला कि उसने अपने साथियों हेमंत रायक उर्फ मोनू और शुभम रेडा उर्फ चीकू के कहने पर महज कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता अपराधियों को उपलब्ध कराया था। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ थाना माणकचौक में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।
गिरफ्तार आरोपियों का विवरण
प्रथम मित्तल (खाताधारक) - निवासी माणकचौक, रतलाम
हेमंत रायक उर्फ मोनू - निवासी रुद्राक्ष कॉलोनी, रतलाम
शुभम रेडा उर्फ चीकू - निवासी नगरवास, रतलाम
क्या होता है 'म्यूल अकाउंट'?
साइबर अपराधी ऑनलाइन ठगी या अवैध धन के प्रवाह को छिपाने के लिए आम लोगों को लालच देकर उनके बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। इन्हें 'म्यूल अकाउंट' कहा जाता है ताकि पुलिस की सीधी पहुंच अपराधियों तक न हो सके।
पुलिस की अपील और सतर्कता
रतलाम पुलिस ने आम जनता को सचेत किया है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर या लालच में आकर अपना बैंक खाता, आधार या अन्य दस्तावेज साझा न करें। "डिजिटल अरेस्ट" जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है; पुलिस या सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी को अरेस्ट नहीं करती। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।