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 रतलाम न्यायालय का फैसला: दुष्कर्म के आरोपी को 10 वर्ष का सश्रम कारावास, डीएनए रिपोर्ट बनी मजबूत आधार​​​​​​​

 

 

रतलाम, 26सितंबर (इ खबर टुडे)। रतलाम के तृतीय सत्र न्यायालय ने लगभग 5 वर्ष पुराने दुष्कर्म के एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य (डीएनए रिपोर्ट) और पीड़िता के अखंडनीय बयानों ने आरोपी को सजा दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई।
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अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी के अनुसार, घटना 17 मई 2021 की है। थाना दीनदयाल नगर क्षेत्र के ग्राम सरवनी खुर्द निवासी पीड़िता दोपहर करीब 11 बजे जंगल में लकड़ियां लेने गई थी। उसी दौरान उसका रिश्तेदार आरोपी लखन (19 वर्ष), पिता वेलजी कटारा वहां पहुंचा और जबरन दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। विरोध करने पर आरोपी ने पीड़िता के साथ मारपीट भी की, जिससे पत्थर लगने से उसके चेहरे पर गंभीर चोट आई थी। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था।

​त्वरित कार्रवाई और वैज्ञानिक साक्ष्य
पीड़िता ने घटना के दिन ही पुलिस थाना दीनदयाल नगर में शिकायत दर्ज कराई थी। उपनिरीक्षक निशा चौबे ने मामले की जांच कर न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया था। पीड़िता का तत्काल डीएनए परीक्षण कराया गया, जिसकी रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हुई।

​अदालत में सिद्ध हुए आरोप
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 6 गवाहों के बयान कराए गए और 14 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए। पीड़िता अदालत में अपने बयानों पर पूरी तरह अडिग रही।

​कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के तर्कों, गवाहों के बयानों और डीएनए रिपोर्ट के आधार पर आरोपी लखन कटारा को दोषी पाया। तृतीय सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को ​धारा 376 (2) (च) भादवि के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹1,000 का जुर्माना, ​धारा 323 भादवि के तहत 1 वर्ष का कारावास एवं ₹1,000 का जुर्माना (कुल ₹2,000 का जुर्माना) की सजा सुनाई।

​शासन की ओर से मामले में प्रभावी पैरवी अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी द्वारा की गई।