त्योहारों से ठीक पहले खाद्य सुरक्षा विभाग की सुस्ती, शहर में एनालॉग पनीर की धड़ल्ले से बिक्री
** नागरिकों की सेहत भगवान भरोसे
रतलाम (विशेष प्रतिनिधि/ इ खबर टुडे )। आगामी त्योहारों के सीजन को देखते हुए जहां एक ओर आम नागरिक खरीदारी की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर मिलावटी और नकली खाद्य पदार्थों का बाजार गर्म होने लगा है। इन दिनों पूरे देश और प्रदेश में 'एनालॉग पनीर' (वनस्पति तेल और स्टार्च और अखाद्य पदार्थो से बना कृत्रिम पनीर) को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनता के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए इसके उपयोग और बिक्री पर कड़े कड़े प्रतिबंध (बैन) लगाने के निर्देश जारी किए हैं। इसके बावजूद रतलाम शहर में खाद्य सुरक्षा विभाग का अमला पूरी तरह सुस्त और निष्क्रिय नजर आ रहा है और शहर में एनालॉग पनीर की बिक्री धड़ल्ले से जारी है।
त्योहारों के ऐन मौके पर पनीर और मावे की मांग कई गुना बढ़ जाती है। विभाग की ढिलाई का सीधा फायदा उठाकर कुछ असामाजिक दूध और डेयरी विक्रेता धड़ल्ले से घटिया और एनालॉग पनीर खपाने में लगे हैं। असली डेयरी पनीर की जगह कम कीमत वाले एनालॉग पनीर को असली बताकर बेचा जा रहा है, जिससे आम जनता के स्वास्थ्य पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञ इसे पाचन तंत्र और हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक मानते हैं।
जांच से दूरी या कर्तव्य की अनदेखी?
जनता की सेहत की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिस खाद्य सुरक्षा विभाग के कंधों पर है, उसकी सुस्त कार्यशैली अब बड़े सवालों के घेरे में है। जिले में वैसे चार चार खाद्य निरीक्षक तैनात है लेकिन इनका पूरा समय मिलावट क्र जंच के बजाय वसूली में निकल जाता है। इसी वजह से शहरवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि विभागीय अधिकारी आखिर प्रमुख चौराहों, डेयरियों और मिलावट के संभावित ठिकानों पर प्रभावी कार्रवाई या सैंपल लेने से परहेज क्यों कर रहे हैं? अधिकारियों की इस रहस्यमयी चुप्पी और अनदेखी से विभाग की मंशा पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं। नागरिको का मानना है कि जिम्मेदार अधिकारी मोटी कमाई के चक्कर में अपने कर्तव्य का पालन बिलकुल भी नहीं कर रहे है।
यदि समय रहते खाद्य विभाग ने नींद से जागकर बड़े पैमाने पर जांच अभियान और सैंपल लेने की कार्रवाई शुरू नहीं की, तो इस त्योहारी सीजन में रतलाम के नागरिकों को अपनी सेहत की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। शहर की जनता ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से तत्काल मामले में हस्तक्षेप कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।