Raag Ratlami UCC: मेडीकल कालेज के आडिटोरियम ने बताया प्रदेश में जल्दी ही लागू होगा यूसीसी/ वर्दी वालों की जय जयकार
-तुषार कोठारी
रतलाम। जिला इंतजामिया ने जुमे के दिन शहर के चुनिन्दा बाशिन्दों को मेडीकल कालेज के आडिटोरियम में बुलवाया और उन्हे यूसीसी पर अपने सुझाव देने को कहा था। सुझाव देने आए लोगों ने ना सिर्फ सुझाव दिए बल्कि भाषण पैलने की अपनी इच्छाएं भी जमकर पूरी की। सुझाव देने आए जालीदार गोलटोपी वालों ने यहां भी अपनी नाखुशी को जाहिर करने में कोई कसर नहीं छोडी। ये सारी कवायद तो हुई लेकिन इससे ये साफ जाहिर हो गया कि सूबे में जल्दी ही यूसीसी लागू होना तय हो चुका है। बस इन्तजार कीजिए उस दिन का जब मध्यप्रदेश में भी यूसीसी लागू होगा।
असल में फूल छाप पार्टी की सरकार वाले दो सूबों में पहले ही यूसीसी लागू किया जा चुका है। देश में जहां भी फूल छाप वालों का कब्जा है,वहां एक एक करके यूसीसी लागू होना तय है। लेकिन शायद मध्यप्रदेश ही ऐसा पहला राज्य है,जहां यूसीसी लाने से पहले लोगों को बुलाकर उनसे रायशुमारी की कवायद की जा रही है। हांलाकि इस रायशुमारी का यूसीसी के ड्राफ्ट पर कोई असर नहीं पडने वाला है। ये सारी कवायद महज लोगों को उनका महत्व जताने के लिए की जा रही है। असलियत ये है कि जिन राज्यों में यूसीसी लागू हो चुका है,कमोबेश वही ड्राफ्ट यहां भी लागू किया जाना है।
यूसीसी पर लोगों की रायशुमारी करने की सारी कवायद सरकार के कहने पर की गई थी और लोगों के सुझाव लेने के लिए सरकार की ओर से एक साहब और एक मैडम जी खास तौर पर रतलाम आए थे। चूंकि अफसरों का बुलावा था इसलिए बडी तादाद में बुद्धिजीवी लोग वहां पंहुचे भी थे। सरकारी अफसरों की मौजूदगी थी,इसलिए कई सारे समझदारों ने सुझाव देने की बजाय अपने अपने भाषण वहां सुना दिए। कुछ विद्वानों से यूसीसी को छोडकर बकाया कई सारे विषयों पर भाषण दे मारे। किसी को पर्यावरण की चिन्ता सता रही थी तो किसी को शिक्षा नीति के बदलाव की चिन्ता थी।
सबसे मजेदार दृश्य तब सामने आए जब जालीदार गोल टोपी वालों ने अपने रोशन खयाल जाहिर किए। जालीदार गोलटोपी वालों को अब तक चार चार शादी करने का विशेषाधिकार हासिल है। यूसीसी में सबसे बडी चोट इसी विशेषाधिकार पर पडने वाली है। इसके अलावा तीन बार तलाक बोलकर अपनी बीबी से छुटकारा पाने का हक भी उन्हे मिला हुआ है। यूसीसी में चूंकि ये सारे हक हकूक खत्म हो जाने है इसलिए सबसे ज्यादा तकलीफ इन्ही लोगों को है।
इसी के चलते एक दो लोग थोडी तैयारी करके पंहुचे थे। एक साहब ने आधी अग्र्रेजी और आधी हिन्दी में अपने ख्याल जाहिर किए। उनका कहना था कि उन्हे मिले विशेषाधिकार उनकी मजहबी हक है और इसे खत्म करने का मतलब आईन(संविधान) की खिलाफवर्जी है। हिन्दुस्तान का आईन उन्हे ये हक देता है कि वे अपने मजहबी अकीदे पर चले। कुल मिलाकर वही बातें जो आए दिन टीवी चैनलों पर बैठे मौलवी मौलाना लोग कहते है। इन लोगों ने यही साबित किया कि उनके खयालात भी देश के दूसरे कïट्टर मजहबी सोच वालो जैसे ही है।
इन बातों का जवाब भी वहीं दे दिया गया। कुछ वक्ताओं ने उनकी बातों को अपने तर्को से गलत साबित कर दिया। एक साहब का कहना था कि देश के संविधान में ही देश के समस्त नागरिकों के लिए एक जैसी संहिता बनाने का संकल्प मौजूद है और यूसीसी को लागू किया जाना उसी संकल्प की पूर्ति करने के लिए है। एक अन्य वक्ता ने बडी अच्छी बात कही। उनका कहना था कि इन लोगों को शादी ब्याह के लिए तो मजहबी कानून चाहिए लेकिन अपराधों के मामले में ये मजहबी कानून को नकार देते है। शरियत के कानून में चोरी करने वाले के हाथ काटने की सजा है। लेकिन अपराध करने पर इन्हे भारतीय न्याय संहिता से कोई दिक्कत नहीं होती। लेकिन जब भी शादी तलाक जैसे मामले आते है इन्हे अपने मजहबी कानून याद आ जाते है।
कुल मिलाकर मेडीकल कालेज के आडिटोरियम में कुछ घण्टों तक चली इस कवायद ने ये साफ कर दिया है कि सरकार जल्दी ही यूसीसी लाने की तैयारी में है। लोगों के सुझाव मांगना इस बात का पक्का संकेत है कि अब हमारे प्रदेश में भी जल्दी ही यूसीसी लागू होने वाला है।
वर्दी वालों की जय जयकार
बीते दिनों में वर्दी वालों ने कई सारे कमाल कर दिखाए। सबसे ताजा वाकया एक नन्हे बच्चे के अपहरण का था,जिसे वर्दी वालों ने महज चौबीस घण्टों के भीतर सही सलामत बरामद कर दिखाया। मामला हुसैन टेकरी का था,जहां एक गरीब दम्पत्ति के महज छ: महीने के बच्चे को रात के वक्त चुरा लिया गया। वर्दी वालों के कप्तान ने इस मामले को बेहद संजीदगी से लेते हुए अपनी पूरी टीम को सक्रिय किया।
वर्दी वालों ने सैैंकडों सीसीटीवी फुटेज खंगाले और रतलाम से सैकडों किलोमीटर दूर जा चुके बच्चे की लोकेशन पता कर डाली। महज चौबीस घण्टों के भीतर बच्चा चुराने वाले दोषियों को गिरफ्तार कर लिया। बच्चे की बरामदगी होने से खुश जावरा के लोगों ने बाकायदा हार फूल लेकर वर्दी वालों के कप्तान का स्वागत किया और वर्दी वालों के लिए जिन्दाबाद के नारे भी लगाए।
आम तौर पर लोग वर्दी वालों की बुराई ही करते नजर आते है। वर्दी वालों के व्यवहार से लोगों को अक्सर शिकायत होती है। ऐसे मौके कम ही आते है जब आम लोग वर्दी वालों की जय जयकार करे। तगडी मेहनत करके नन्हे बच्चे को बरामद करने पर लोगों ने वर्दी वालों की जय जयकार की। वर्दी वालों के लिए इससे बडी उपलब्धि क्या हो सकती है। उम्मीद की जानी चाहिए कि वर्दी वाले अपनी इस छबि को आगे भी कायम रखेंगे।