Raag Ratlami Loud speaker : नए साहब ने दिखाया दम,सख्ती से उतरवाए पांच वक्त चीखने वाले डेढ दर्जन भोंगले/ कहां तक जाएगी पंजा पार्टी के पप्पू की "गूंज"
-तुषार कोठारी
रतलाम। शहर में निकले एक जन्मदिन वाले जुलूस में दम घोंटू और कानफोडू डीजे साउण्ड से एक पुराने नेता की जान चली गई। खबरें बनी और तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आई। शायद इसी का असर हुआ कि जिला इंतजामिया के नए साहब ने कोनफोडू आवाजें करने वाले भोंगलों को हटाने का फरमान जारी कर दिया और नए साहब के फरमान के चलते सरकारी कारिन्दों ने पहले ही दिन डेढ दर्जन भोंगले हटवा दिए। ये भी कहा गया कि ये मुहिम सात दिनों तक जारी रहेगी। हांलाकि पहले दिन के बाद इस तरह की खबरें अब तक देखने को नहीं मिली है।
वैसे भोंगलों को हटाने का पहला फरमान तो सूबे के मुखिया ने कुर्सी सम्हालने के पहले ही दिन जारी कर दिया था। उस वक्त भी दो चार दिन भोंगले हटाने उतारने की मुहिम चली थी,लेकिन दो-चार दिन के बाद ही ये मुहिम टांय टांय फिस्स हो गई थी और फिर से शहर के हर हिस्से में दिन में पांच पांच बार भोंगलों की चीख पुकार शुरु हो गई थी।
इसको लेकर कई बार खबरें छापी गई। सरकारी अफसरों को याद भी दिलाया गया कि भोंगलों को हटाने का हुक्म सबसे पहले देश की सबसे बडी अदलिया ने दिया है और फिर सूबे के मुखिया ने भी यही हुक्मनामा जारी कर दिया है। इसलिए अफसरों को दिन में पांच पांच बार चीखने वाले भोंगलों को तुरंत हटाना चाहिए। लेकिन सरकारी अफसरों ने इस पर कतई ध्यान नहीं दिया। मजेदार बात ये भी थी कि जिला इंतजामिया के तमाम बडे अफसर जिन बंगलों में रहते है,उसी इलाके में भोंगलों की आवाजें सबसे तेज सुनाई देती है। इसके बावजूद भी अफसर अपने कानों में उंगलिया डाले रहते थे।
फिर जब जुलूस में डीजे की तेज आवाज नेएक पुराने नेता की जान ले ली तब फिर से तेज आवाजों की खिलाफत शुरु हुई और आखिरकार बडे साहब ने नए सिरे से भोंगलों को हटाने का फरमान जारी कर दिया है। हफ्ते के शुरुआती दिनों में पांच स्थानों से डेढ दर्जन भोंगले हटाए जाने की खबरें सामने आई थी। जिला इंतजामिया की ओर से बताया गया था कि ये मुहिम सात दिनों तक जारी रहेगी। तब लगा था कि शहर के बाशिन्दों को अब कानफोडू चीखों से मुक्ति मिल जाएगी। लेकिन पहले दिन की मुहिम के बाद मुहिम कहीं भी नजर नहीं आई। जो डेढ दर्जन भोंगले हटे थे,उतने ही हटे रह गए। इसके बाद कहीं से भी भोंगले हटाने की कोई खबर नहीं आई।
लोगों को उम्मीद है कि नए आए बडे साहब ने जो दम दिखाया था,वैसा ही वे आगे भी दिखाएंगे और शहर में अभी भी लोगों को परेशान कर रहे भोंगलों को पूरी तरह से हटवाएंगे। अगर सरकारी मुहिम धीमी पड गई तो ये भी तय है कि बडे साहब के फरमान से हटवाएं गए डेढ दर्जन भोंगले कुछ ही दिनों में वापस से अपनी पुरानी जगहों पर टंग जाएंगे और फिर से रोजाना दिन में पांच बार लोगों को परेशान करने के काम में जुट जाएंगे। इसलिए ये जरुरी है कि बडे साहब इस मुहिम को तब तक जारी रखें जब तक कि तमाम जगहों से दिन में पांच पांच बार चीखने वाली कानफोडू आवाजों को बन्द ना कर दिया जाए।
कहां तक जाएगी पंजा पार्टी के पप्पू की "गूंज"
पंजा पार्टी के युवराज पप्पू अगले हफ्ते छात्रों को अपनी गूंज सुनाने के लिए इन्दौर आ रहे हैैं। पंजा पार्टी के नेता, पप्पू की गूंज को दूर दूर तक गुंजाने की तैयारियों में जुटे हैैं। नई दिल्ली के जंतर मंतर पर काकरोचों की उठापटक के बाद "जेन जी" को जोडने के चक्कर में पंजा पार्टी ने युवराज के लिए गूंज वाला प्रोग्र्राम डिजाईन किया और तीन अलग अलग शहरों में गूंज के कार्यक्रम भी हो गए।
"जेन जी" पर इसका कितना असर हुआ,हुआ या नहीं हुआ,ये तो अलग मुद्दा है। लेकिन इसका एक सीधा असर ये हुआ कि इंटरनेट पर "झूठ की गूंज" नाम की एक वेबसाइट आ गई जिसने युवराज के तमाम दावों की पोल खोल कर रख दी। "झूठ की गूंज" के सामने आते ही फूल छाप के तमाम नेता इस वेबसाइट को प्रमोट करने लगे और देखते ही देखते ये वेबसाइट इंटरनेट पर छा गई।
अब युवराज इन्दौर में गूंजने की तैयारी कर रहे हैैं। पंजा पार्टी ने इस गूंज से अपने नेताओं को दूर रखा है। गूंज में शामिल होने के लिए बारकोड जारी किए गए है,जिसे स्कैन करके गूंज के लिए रजिस्ट्रेशन करने की व्यवस्था रखी गई है और कालेज वाले छात्रों को बारकोड स्कैन करने का आïव्हान किया जा रहा है। पंजा पार्टी की जानकारी रखने वालों का कहना है कि बारकोड स्कैन करने वालों में रतलाम के करीब डेढ हजार लोग है। पंजा पार्टी के नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है कि बारकोड स्कैन करने वालों को इन्दौर लेकर जाना है।
पंजा पार्टी की हालत पहले से खराब चल रही है। बडा सवाल ये है कि बारकोड स्कैन करने वालों को इन्दौर लेकर जाने के लिए गाडियों की व्यवस्था कौन करेगा? इसका खर्चा कौन उठाएगा? अगर सचमुच में डेढ हजार लोग इन्दौर जाने के तैयार हो गए तो इ्न्हे ले जाने के लिए करीब तीस पैैंतीस बसों की जरुरत पडेगी और पर मोटा माल खर्च होगा? वैसे पंजा पार्टी वालों को ये भी उम्मीद है कि ये व्यवस्था पंजा पार्टी में उपर से की जाएगी। अब सवाल ये है कि वास्तव में इन्दौर जाएंगे कितने लोग? सवाल ये भी है कि पंजा पार्टी के युवराज पप्पू की ये गूंज कहां तक जा पाएगी? गूंज का असर कहां तक और कितना होगा? इसका पता तो गूंज का कार्यक्रम पूरा होने के बाद चलेगा।
खास रहेगा बप्पा का उत्सव
पूरे शहर में जगह जगह मंगलमूर्ति विघ्नविनाशक गणपति बप्पा विराज चुके है। बप्पा की प्रतिमाएं अब घर घर और पाण्डालों में जाकर बिराजेंगी। बप्पा के ग्यारह दिनों तक चलने वाले उत्सव के लिए इस बार खास तैयारियां की जा रही है। बप्पा की भक्ति से भरे इस उत्सव को इस बार भक्ति के साथ साथ सामाजिक सरोकारों से भी जोडने की तैयारी की जा रही है।
प्रत्येक पाण्डाल में बप्पा की आरती के समय,सामाजिक सरोकारों से जुडे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी और बप्पा के भक्तों से देश और समाज के मुद्दों पर संकल्प भी करवाए जाएंगे। बप्पा के भक्तों से पर्यावरण संरक्षण,स्वच्छता,नागरिक अनुशासन,प्लास्टिक से मुक्ति जैसे विषयों पर चर्चा कर उन्हे प्रेरित किया जाएगा कि वे बप्पा की भक्ति के साथ साथ अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन भी लाने का प्रयास करें जिससे कि हमारा समाज सशक्त और संगठित हो सके।
बप्पा के उत्सव को सामाजिक सरोकारों से जोडने के लिए तैयारियां भी जोरों पर है। सामाजिक सरोकारों के इन मुद्दों पर चर्चा,बैठकों के दौरचल रहे हैैं ताकि प्रत्येक पाण्डाल में इन विषयों पर न सिर्फ चर्चा हो बल्कि गणेशोत्सव के समापन के साथ समाज में आया परिवर्तन दृष्टिगोचर भी होने लगे। इतना ही नहीं,शहर भर के समस्त गणपति बप्पा के विसर्जन की शोभायात्रा भी इस बार बेहद खास होगी। क्योंकि शहर के इतिहास में पहली बार तमाम पाण्डालों से निकलने वाली शोभायात्राएं इस बार एक साथ निकलेगी और जब ऐसा होगा तो ये दृश्य सचमुच में ऐतिहासिक होगा।