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 Raag Ratlami Land Scam - बदनाम जमीनखोर के पुराने घोटाले की जांच फिर से शुरु,देर जरुर हुई है लेकिन नहीं होगा अन्धेर

 
 

-तुषार कोठारी

रतलाम। खुद को राजाओ का इन्द्र समझने वाले शहर के बदनाम जमीनखोर का पुराना कारनामा फिर से चर्चाओं में आ गया है। राजीव गांधी सिविक सेन्टर के प्लाटों को एक ही वक्त में दो बार बेचने खरीदने के कारनामे की फाइल फिर से खोली गई है। घोटालो की जांच के लिए बनाई गई सरकारी एजेंसी ने शहर सरकार के उस वक्त के अफसरों को बुलाकर उनसे पूछताछ शुरु कर दी है। 

कहानी करीब दो ढाई साल पहले की है,जब बदनाम जमीनखोर ने शहर सरकार के बडे अफसर के साथ मिलीभगत करके सिविक सेन्टर के प्लाटों की रजिस्ट्री लोगों के नाम करवाई थी। कमाल ये था कि शहर सरकार की रजिस्ट्री होने के फौरन बाद में इन्ही प्लाटों की रजिस्ट्री जमीनखोर ने अपने नाम पर करवा ली। अब जैसे ही लोगों को इस घोटाले की भनक लगी,शहर भर में हो हल्ला मच गया। शहर सरकार के ही कुछ नुमाइन्दो ने इस घोटाले की शिकायत एजेंसियों तक पंहुचा दी। एजेंसियों ने घोटाले की जांच भी शुरु कर दी। एक दो अफसरों को सस्पैण्ड भी कर दिया गया।

लेकिन बदनाम जमीनखोर को घोटाले करने और घोटालों की जांच को रफा दफा करवाने में महारत हासिल है। जमीनखोर ने इस मामले में भी अपने पुराने दांव पेंच अपनाए और इस घोटाले की जांच को दो ढाई साल तक लटकवा दिया। लेकिन हर बात की एक लिमिट होती है। दो ढाई साल तक रुकी हुई जांच आखिरकार अब फिर से चल पडी है।

वैसे घोटालों की जांच करे वाली एजेंसी की चाल भी बेहद धीमी ही होती है,इसलिए अभी भी जल्दी कुछ होने की उम्मीद नहीं की जा सकती,लेकिन जांच फिर से शुरु होने से इतना तो तय है कि मामला अभी चल रहा है। मामले की जांच चल रही है तो ये भी तय है कि जांच कहीं ना कहीं तो पंहुचेगी ही। जमीनखोर अपने जांचे परखे दांव पेंच अभी भी लगाएगा,ताकि या तो ये जांच ही रुक जाए या फिर जांच हो,तो ऐसी हो कि जमीनखोर इसमें से बच निकले। 

घोटाले में दस्तावेजों को रजिस्टर्ड करने वाले महकमे में अफसरों की भी मिलीभगत थी। रजिस्ट्री वाले अफसरों की मिलीभगत के बिना इस तरह का घोटाला हो ही नहीं सकता था। एजेंसी की जांच में रजिस्ट्री वाले अफसरों पर भी गाज गिरना तय है। 

बदनाम जमीनखोर का कमाल ये है कि उसके हर काम और हर कालोनी में कोई ना कोई घोटाला होता है। जानकारों का कहना है कि ये जमीनखोर बिना घोटाले के कोई काम कर ही नहीं सकता। शहर सरकार से कौडियों के दाम जमीन लेकर उस पर स्कूल बनाना हो,या अपनी कालोनी से लगी सरकारी जमीन को अपनी बता कर बेचने का मामला हो। इस जमीनखोर के घोटालों की फेहरिस्त बहुत लम्बी है। जमीनखोर अब तक तो अपने दांव पेंच लगा लगा कर इन घोटालों की जांच से बचता रहा है,लेकिन इतना तय है कि उसके दांव पेंच हमेशा कामयाब होने वाले नहीं है। वह दिन भी जल्दी आएगा,जब जमीनखोर अपने घोटालो के चक्कर में हवालात की हवा खाने पंहुचेगा। कानून की कहानियो में देर जरुर होती है लेकिन अन्धेर नहीं होता है। एक ना एक दिन इंसाफ जरुर होता है।

मिलावटी घी पर इंतजामिया की स्ट्राइक

आमतौर पर त्यौहारों के सीजन में सरकारी कारिन्दे मिठाई और नमकीन की दुकानों पर छापे मारते है और खाद्य पदार्थों के नमूने इकट्ठे करके जांच के लिए भिजवाते है। नमूने लेने और जांच के लिए भिजवाने के एवज में खाद्य सुरक्षा वाले महकमे के अफसरों के त्यौहार बढिया मन जाते है। जिन दुकानदारों पर छापा पडता है वे तो भेट पूजा करते ही है,जिनके यहां छापा नहीं पडता,वो छापा नहीं मारने के लिए भेंट पूजा कर देते है।

लेकिन बीते हफ्ते अचानक से सरकारी कारिन्दों ने नकली और मिलावटी घी बेचने के मामले में एक फर्म पर छापा मारा और कई सारे नमूने लेकर जांच के लिए भिजवाए। सरकारी कारिन्दों को शिकायत मिली थी कि यहां सस्ता देसी घी बेचा जा रहा है। देसी घी अगर सस्ता है,तो इसका सीधा सा मतलब यही है कि वह मिलावटी या नकली घी है। बिना त्यौहार के खाद्य सामग्र्री की जांच करवाने की कार्रवाई लोगों को ठीक लगती है।

लेकिन इस महकमे के करने के लिए और भी कई सारे काम है,जो कि नहीं किए जाते। खाद्य तेल खुला नहीं बेचे जाने के सरकारी हुकुम के बाद अब तमाम तेल पैकेट में पैक करके बेचे जा रहे है। ज्यादातर लोग सोयाबीन तेल का इस्तेमाल करते है,इसलिए सबसे ज्यादा बिक्री सोयाबीन तेल की होती है। शहर में दर्जनों ब्रान्ड के सोयाबीन तेल बेचे जा रहे है। सवाल ये है कि सोयाबीन तेल बनाने वाली फैक्ट्रिया तो गिनी चुनी ही है,तो फिर सोयाबीन के दर्जनों ब्राण्ड कैसे बिक रहे है। जवाब ये है कि शहर में कुकुरमुत्तों की तरह पैकेजिंग प्लान्ट तैयार हो गए है,जहां अलग अलग ब्रान्ड के सोयाबीन तेल पैक किए जा रहे है। सोयाबीन तेल पैक करने वाले ये लोग सुरक्षा मानको का ना तो पालन करते है और ना ही दूसरे नियमों का ध्यान रखते है। इतना ही नहीं बेचे जा रहे तेल की क्वालिटी और वजन का मामला भी गडबड है। खाद्य सुरक्षा वाला महकमा कभी इस तरफ भी ध्यान दे तो आम लोगों को काफी सुरक्षा मिल सकेगी।

गायों के लिए खुलेगा अस्पताल

शहर में तारीफे काबिल पहल की जा रही है। गायों के लिए एक अस्पताल खोला जा रहा है,जहां बीमार गायों का उपचार किया जाएगा। जिस देश में गाय को पूजनीय माता का दर्ज दिया जाता है,वहां कई बार गायों को विकट परिस्थितियों में रहना पडता है। ऐसे में गायों के लिए अस्पताल होना न सिर्फ उनके लिए बल्कि गौ भक्तों के लिए भी बडी राहत की बात होगी। 

शहर में कालोनियां विकसित करने वाले दो जाट बन्धुओं में से छोटे भाई ने पिछले दिनों एक बडे सन्त के सानिध्य में पैदल नर्मदा परिक्रमा पूरी की। नर्मदा परिक्रमा का ही प्रभाव रहा कि यात्रा का सफल समापन होने पर उनके मन में कन्याओं का सामूहिक विवाह करने और गायों के लिए अस्पताल खोलने का विचार आया और रविवार को मथुरी रोड पर हुए एक भव्य आयोजन में ग्यारह कन्याओं का विवाह तो सम्पन्न हुआ ही,गायों के अस्पताल की आधारशिला भी कई संतों और बडे नेताओं की मौजूदगी में रखी गई। उम्मीद की जानी चाहिए कि गायों का यह अस्पताल जल्दी ही गायों को अपनी सेवा देने लगेगा।