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Raag Ratlami Ganeshotsav:समाज को जागरुक करेगा,आजादी के आन्दोलन में भूमिका निभाने वाला "विघ्न विनाशक का उत्सव" / वाहन चालकों के लिए मुसीबत बना टोलबूथ

 

 

 

-तुषार कोठारी

रतलाम। बीते हफ्ते शहर में निकले कानफोडू आïवाजों वाले जुलूस की खबरें चर्चाओं में थी। इस कानफोडू शोर के कारण एक व्यक्ति को अपनी जान भी गंवानी पडी थी और शोर मचाने वालों के खिलाफ मामले भी दर्ज हुए थे। लेकिन अब विघ्नविनाशक मंगलमूर्ति के दस दिवसीय उत्सव की तैयारियां चर्चाओं में है। आजादी के पहले बप्पा के उत्सव ने लोगों में आजादी के लिए जागरुकता उत्पन्न करने में बडी भूमिका निभाई थी। अब बप्पा के उत्सव को समाज को मजबूत करने और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर जागरुकता फैलाने के उपयोग में लाने की तैयारी है। 

रविवार को हजारों की संख्या में एकत्र हुए हिन्दू समाज के लोगों ने इस बार के उत्सव को खास बनाने के लिए विचार विमर्श किया। कुछ सालों पहले विघ्न विनाशक के उत्सव के दौरान विघ्न पैदा किया गया था और एक युवक को अपनी जान तक गंवानी पडी थी। उस दुखद घटना का जिक्र भी इस विचार विमर्श के दौरान हुआ और एकत्रित हुए तमाम लोगों ने दस दिवसीय आयोजन में सुरक्षा के मुद्दे को भी रेखांकित किया।

अब उत्सव में किसी तरह का विघ्न ना आ सके इसके लिए समाज को अधिक संगठित रुप से एकत्रित होकर उत्सव का आयोजन करने का भी विचार किया गया। रविवार को हुए एकत्रीकरण ने यह भी दिखा दिया कि किसी जमाने में अलग अलग जाति समूहों में बंटा हिन्दू समाज अब एक जाजम पर आ चुका है और इसकी संगठित शक्ति अब दिखाई देने लगी है।

काली टोपी वालों की अगुवाई में अब बप्पा का दस दिवसीय उत्सव सिर्फ भक्ति और पूजा पाठ का ही नहीं रहेगा,बल्कि पर्यावरण और स्वदेशी के उपयोग जैसे मुद्दों के लिए भी उपयोगी साबित होगा। समाज के प्रमुख लोग अलग अलग पाण्डालों में जाकर वहां के भक्तजनों से पर्यावरण सुरक्षा और स्वदेशी के उपयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे और उन्हे इसके लिए प्रेरित भी करेंगे। विचार विमर्श के एकत्रीकरण में शहर के कोने कोने से आए हजारों महिला पुरुषों की संख्या देखने भर से यह स्पष्ट हो गया कि बप्पा का उत्सव अब समाज के जागरण की पुरानी भूमिका को निभाने की ओर बढ चला है।

नन्ही बच्चियों का कमाल

बीते हफ्ते की एक बडी खबर ये भी है कि कई सारी नन्ही बच्चियां अब सडक़ों पर कमाल दिखाने लगी है। गोगा नवमी को निकलने वाले जुलूस में नन्ही बच्चियों ने जिस तरह से शस्त्र कला का प्रदर्शन किया वो हर किसी के लिए गौरवान्वित होने का मौका था। नन्ही बच्चियों के इस प्रदर्शन से जहां उनकी हिम्मत और बहादुरी साफ दिखाई दे रही थी,वहीं उन्हे प्रशिक्षित करने वालों का ये जज्बा भी साफ दिख रहा था कि अब बालक और बालिकाओं में फर्क नहीं किया जाता।

जिस समाज को कथित रुप से पिछडा और दलित कहा जाता था,उस समाज में बालिकाओं को इस तरह प्रशिक्षित किया जाना वास्तव में सराहनीय तो है ही। इससे ये भी साबित होता है कि अब प्रत्येक समाज में बालिकाओं को आगे लाया जा रहा है। बालिकाओं को बालकों से कम महत्व दिए जाने की बातें अब बीते वक्त की हो चली है। नन्ही बालिकाओं के करतबों से साफ जाहिर है कि आने वाले वक्त में ये बालिकाएं सफलता के नए सोपान पार करेगी।

वाहन चालकों के लिए मुसीबत बना टोलबूथ

शानदार फोरलेन पर आरामदायक यात्रा करके टोल बूथ पर पंहुचने वाले हर वाहन चालक के लिए टोल बूथ अब मुसीबत बन चुका है। अपने गंतव्य पर समय से पंहुचने की कोशिश में तेजी से पंहुचने वाले वाहन चालक जैसे ही टोल बूथ पर पंहुचते है उनके पूरे समय का सत्यानाश हो जाता है। टोलबूथ पर उन्हे इतना लम्बा इंतजार करना पडता है कि उनकी पूरी यात्रा का मजा किरकिरा हो जाता है।

शहर से निकलने के बाद पडने वाले पहले टोलबूथ पर व्यवस्थाएं बेहद घटिया है। फास्टैग होने के बावजूद बूथ पर वाहनों की लम्बी कतारें लगती है। टोल बूथ वालों के सेंसर फास्टैग को पकड ही नहीं पाते। वाहन चालक इंतजार करते रहते है और कतारें लम्बी होती जाती है। सुनवाई करने के लिए कोई नहीं है। कायदे से बूथ पर अधिक समय लगने पर वाहन को बिना शुल्क के निकाला जाना चाहिए,लेकिन टोल बूथ चलाने वाली कम्पनी,अपनी कमाई का कोई मौका नहीं छोडना चाहती। भले ही वाहन चालकों का कीमती वक्त उनकी लापरवाही से बरबाद होता रहे। फोरलेन पर नजर रखने वाले महकमे के अफसर अगर इसमें जल्दी सुधार नहीं करवा पाते तो टोल बूथ पर कभी भी बडा हंगामा खडा हो सकता है। 

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