Raag Ratlami Budget : शहर के मुद्दे छोडकर,पंजा पार्टी ने मचाया राष्ट्रीय मुद्दों पर हंगामा,फूलछाप ने पास करवा लिया बजट
-तुषार कोठारी
रतलाम। लम्बे समय के बाद शहर की राजनीति में उठापटक देखने को मिली। शहर सरकार को अपना बजट पेश करना था और इसी चक्कर में शहर सरकार का साधारण सम्मेलन बुलाया गया। लम्बे समय के बाद साधारण सम्मेलम हो रहा था,इसलिए पंजा पार्टी ने भी मौके का फायदा लेने की जमकर तैयारी की थी। धमाचौकडी,हंगामा, वाक आउट सबकुछ हुआ और आखरी नतीजे के रुप में शहर सरकार में पंजा पार्टी के एक नेताजी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया।
मामला बजट का था,इसीलिए शहर सरकार को साधारण सम्मेलन बुलाना पडा,वरना शहर सरकार के कर्ता धर्ताओं को साधारण सम्मलेन बुलाने में कोई रुचि नहीं है। मजबूरी थी,इसलिए सम्मेलन बुलाया गया। पंजा पार्टी वालों ने भी फौरन,साधारण सम्मेलन में हंगामा मचाने की तैयारी कर डाली। पंजा पार्टी के नेताओं को भी यही लगता है कि साधारण सम्मेलन में हंगामा मचा देने भर से वोटर उनकी तरफ खिंचे चले आएंगे और इसी तरह हंगामें होते रहे तो एक ना एक दिन शहर सरकार पर पंजा पार्टी का कब्जा भी हो जाएगा।
बस इसी चक्कर में पंजा पार्टी वालों ने सम्मेलन में उठापटक चालू कर दी। सम्मेलन शहर सरकार का था,तो शहर के मुद्दों पर हंगामें होना चाहिए,लेकिन पंजा पार्टी वाले दिल्ली से लगाकर यहां रतलाम तक,एक ही गलती करते हैैं। उन्हे यह समझ में ही नहीं आता कि वोट देने वाले लोग घांस नहीं खाते। सब के सब समझदार हो चुके है। उन्हे पता है कि उनके मुद्दे कौन से है? अगर वोट देने वालों के मुद्दे उठाकर विपक्ष हंगामा करता है तो वोटर विपक्ष का साथ देता है। लेकिन पंजा पार्टी वालों को इससे कोई मतलब नहीं है। उनका मतलब है हंगामे से। इसीलिए पंजा पार्टी वालों ने शहर के तमाम मुद्दों को छोड कर राष्ट्रीय स्तर के वीर क्रान्तिकारी पर उटपटांग आरोप लगाने शुरु कर दिए।
अब बारी फूल छाप वालों की थी। कालापानी की सजा काटने वाले हिन्दुत्ववादी वीर क्रान्तिकारी के खिलाफ उटपटांग आरोप लगे तो फूल छाप वालों ने भी हंगामा शुरु कर दिया। फूल छाप वालो ने पंजा पार्टी वालों के पुतले बनाकर जलाए तो पंजा पार्टी वालों ने फूल छाप वालों के पुतले जला डाले। कुल मिलाकर शहर का कोई मुद्दा चर्चा में नहीं आया। हंगामा हुआ तो साधारण सम्मेलन अगले दिन के लिए टाल दिया गया।
शहर के नागरिकों को फिर उम्मीद थी कि शायद अब शहर के किसी मुद्दे पर कोई सार्थक बहस देखने को मिलेगी,लेकिन हुआ इसका उलटा। शहर सरकार ने शहर के लिए 543 करोड से अधिक का बजट पेश किया। लोगों को लगा था कि पंजा पार्टी वाले विपक्ष की अपनी भूमिका अच्छे से निभाते हुए बजट के प्रावधानों पर कोई सार्थक चर्चा करेंगे। लेकिन आदत से लाचार पंजा पार्टी वालों ने एक सडक़ को लेकर विवाद शुरु कर दिया। पंजा पार्टी वालों का कहना था कि मांगल्य मन्दिर को जोडने वाली सडक़ की कोई जरुरत ही नहीं है,इसलिए ये सडक़ बनने नहीं दी जाएगी। हंगामा हुआ और पंजा पार्टी वाले वाकआउट करके बाहर निकल गए।
बस फिर क्या था,फूल छाप वालों के बजट को पास करने में अब कोई दिक्कत नहीं थी। बडे आराम से बजट पास हो गया। ज्यादातर लोगों को ये पता भी नहीं चला कि बजट में क्या अच्छा है और क्या बुरा? बजट पास करने की रस्मअदायगी,हंगामें की रस्म अदायगी सबकुछ हो गया। आखिर में इस सारी उठापट का जो नतीजा निकला वो ये था कि कालापानी की सजा काटने वाले वीर क्रान्तिकारी के खिलाफ अनर्गल आरोप लगाने वाले पंजा पार्टी के नेताजी के खिलाफ फूलछाप वालो ने रिपोर्ट दर्ज कराई और वर्दी वालों ने रिपोर्ट पर से मुकदमा दर्ज कर लिया। 22 नम्बर वाले की रिपोर्ट पर 24 नम्बर वाले के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है। अब गिरफ्तारी और जमानत वाला सिलसिला चलेगा। कुल मिलाकर पंजा पार्टी वालो ने मिले हुए अच्छे मौके को फिर से गंवा दिया।
चलते बैल को आर चुभोना
पुरानी कहावत है चलते बैल को आर चुभोना। पंजा पार्टी इस कहावत पर पूरी तरह फिट है। बीते दिनों युवा पंजा पार्टी के जिला स्तर के कई नेताओं को वार्निंग जारी की गई। इनमें रतलाम की युवा पंजा पार्टी के मुखिया भी शामिल है जिन्हे उपर वालो ने वार्निंग दी है। उपर वालों का कहना है कि जो नेता ठीक से काम नहीं कर रहे थे,उन्हे वार्निंग दी गई है। अब तीन महीने तक उनके कामकाज पर नजर रखी जाएगी और अगर उनके काम में सुधार नहीं आया तो उन्हे हटा दिया जाएगा।
मजेदार बात ये है कि इन दिनों पंजा पार्टी में जमीनी नेता लगभग नदारद है। पंजा पार्टी वाले जब भी कोई प्रदर्शन करते है,उसमें शामिल होने वालों की तादाद उंगलियों पर गिनी जा सकने वाली ही होती है। ले देकर पंजा पार्टी की युवा इकाई के मुखिया एक ऐसे नेता थे,जिनके पास अच्छा खासा जनाधार और युवाओं की अच्छी खासी संख्या थी। पिछली बार हुए शहर सरकार के चुनाव में भी युवा पंजा पार्टी के इसी मुखिया को मैदान में उतारा गया था और उन्होने फूल छाप को कडी टक्कर देते हुए पंजा पार्टी की लाज भी बचाई थी। लेकिन अब पंजा पार्टी उसी जनाधार वाले नेता को निकम्मा बताकर नोटिस दे रही है। इसी को कहते है चलते बैल को आर चुभोना। यही वजह है कि पंजा पार्टी लगातार पाताल में उतरती जा रही है और पंजा पार्टी के बडे नेता गलतियों पर गलतियां करते जा रहे है।
फूल छाप वालों का इंतजार
फूल छाप के नेताओँ की किस्मत में शायद सिर्फ इंतजार करना लिखा है। पहले तो जिले भर के नेता इंतजार कर रहे थे। लेकिन अब उनमें से जिला मुख्यालय वालों को छोडकर बाकी का इंतजार खत्म हो चुका है। जिले की तमाम नगर सरकारों में एल्डरमैन नियुक्त हो चुके है। इधर रतलाम में कई सारे पदों को लेकर नियुक्तियां होना है। सबसे बडी नियुक्ति तो विकास प्राधिकरण की है। इसके बाद शहर सरकार के छ: एल्डरमैन बनाए जाने है। जिले के अन्य स्थानों की नियुक्तियां हुई थी,तो लगा था कि दो चार दिनों में ही बाकी लोगों का इंतजार भी खत्म हो जाएगा। लेकिन इंतजार है कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा। उम्मीदें लगाए बैठे नेता अपने वरिष्ठों से पूछते है और वरिष्ठ नेता बस दो चार दिन का दिलासा दे देते है। दो-चार दो-चार करते करते महीने भर से ज्यादा गुजर गया है,लेकिन इंतजार अभी जारी है।